Daily Voice : राइट रिसर्च, पीएमएस की फाउंडर और फंड मैनेजर सोनम श्रीवास्तव ने मनीकंट्रोल को दिए एक साक्षात्कार में कहा, "ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) और पावर स्पेस निवेश के नजरिए से काफी अच्छे नजर आ रहे हैं। आगे इनमें ग्रोथ की काफी व्यापक संभावना है। पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल डीजल) से रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों की ओर तेजी से बदलाव अनिवार्य जरूरत बनता जा रहा है"। सोनम का मानना है कि यह बदलाव नई खोजों, निवेश और ग्रोथ के लिए व्यापक अवसर पेश कर रहा है।
क्वांटिटेटिव रिसर्च और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का 9 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाली सोनम श्रीवास्तव का कहना है कि जैसे-जैसे नतीजों का मौसम नजदीक आ रहा है कैपिटल गुड्स, मेटल, फार्मा, आईटी और कंज्यूमर स्टेपल जैसे सेक्टर निवेशकों के लिए कमाई के अच्छे मौके दे रहे हैं। इन सेक्टरों के नतीजे और आगे के गाइडेंस अच्छे रहने वाले हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शॉर्ट टर्म में कर सकती हैं परेशान
सोनम का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शॉर्ट टर्म में इक्विटी बाजार के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। जैसे ही तेल की कीमतें बढ़ती हैं, महंगाई की चिंता बढ़ जाती है। कच्चा तेल कई सेक्टरों के लिए सबसे बड़ा इनपुट लागत है। महंगाई का दबाव कंपनियों मुनाफे को कम कर सकता है। इससे स्टॉक का वैल्यूएशन कम हो सकता है। इसके अलावा भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का देश के खजाने पर तुरंत असर आता है।
जैसे-जैसे ऊर्जा की लागत बढ़ती है, कारोबारी और उपभोक्ता अन्य क्षेत्रों में होने वाले खर्च में कटौती कर सकते हैं। इससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है। इससे अंतत: स्टॉक की कीमतों पर भी निगेटिव असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, तेल की कीमतों की अस्थिरता शेयर बाजार में भी वोलैटिलिटी ला सकती है। इससे निवेशक अधिक सतर्क हो सकते हैं और शेयर बाजार से पूंजी बाहर निकल सकती है।
कई सेक्टरों का वैल्यूएशन महंगा
बाजार पर बात करते हुए सोनम ने आगे कहा कि हालिया तेजी के बाद भारतीय इक्विटी बाजार में कई सेक्टरों का वैल्यूएशन महंगा दिख रहा है। मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप सेगमेंट में अब तक काफी तेज उछाल देखने को मिला है। जिसके कारण इनका वैल्यूएशन इनके ऐतिहासिक औसत की तुलना में बहुत ज्यादा हो गया है। इस तेजी में भारी मात्रा में नकदी की उपलब्धता, रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और आर्थिक सुधार और ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर निवेशकों के बढ़े विश्वास का अहम योगदान है।
इसके अलावा नए जमाने के टेक शेयरों ने काफी हाई वैल्यूशन पर बाजार में शुरुआत की। हालांकि इन शेयरों ने हाल के दिनो में अच्छी वापसी की है लेकिन उनके वर्तमान वैल्यूएशन से संकेत मिलता है कि इसमें इनके भावी ग्रोथ की अधिकांश संभावना को पहले से ही शामिल कर लिया गया है। निवेशकों को इन सेक्टर्स में निवेश से पहले सावधानी बरतनी चाहिए और पूरी तरह से जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए। वास्तविक विकास क्षमता वाले सेक्टरों और उन सेक्टरों के बीच अंतर करना जरूरी है जहां वैल्यूशन को बुनियादी मजबूती का सपोर्ट नहीं है।
सितंबर तिमाही के नतीजे अच्छे रहने की उम्मीद
सितंबर तिमाही के आने वाले नतीजों पर बात करते हुए सोनम ने कहा कि सितंबर तिमाही के नतीजों भारतीय बाजार में कई सेक्टर बेहतर प्रदर्शन और संभावित री-रेटिंग के लिए तैयार दिख रहें हैं। बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार के जोर और निजी पूंजीगत व्यय में तेजी के चलते कैपिटल गुड्स का प्रदर्शन मजबूत रहने की संभावना। चीन और दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मजबूत मांग के चलते मेटल सेक्टर में भी मजबूती देखने को मिलेगी।
जेनेरिक दवाओं की मजबूत मांग और बढ़ते निर्यात के कारण फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर के भी फलने-फूलने की उम्मीद है। आईटी सेक्टर को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेवाओं की बढ़ती मांग से फायदा मिलेगा। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं की निरंतर मांग के चलते कंज्यूमर स्टेपल सेक्टर (consumer staples sector) का प्रदर्शन भी मजबूत रहने की उम्मीद है।
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