Pharma stocks : शुक्रवार को इंट्राडे में फार्मा शेयरों में 9.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके चलते निफ्टी फार्मा इंडेक्स 3 फीसदी तक भाग गया। रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल की तरफ से ग्लेनमार्क लाइफ साइंसेज (जीएलएस) में प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री पर पॉजिटिव नजरिया पेश करने के बाद ग्लेनमार्क में जोरदार तेजी आई। कारोबार के अंत में ये 78.55 रुपये यानी 10.11 फीसदी की बढ़त के साथ 855.50 के स्तर पर बंद हुआ है। वहीं, अरबिंदो फार्मा के शेयर एनएसई पर लगभग 6 फीसदी उछलकर 930 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए। कंपनी को रेवलिमिड दवा लॉन्च करने की मंजूरी मिल गई है, जिसका इस्तेमाल मल्टीपल मायलोमा वाले वयस्क रोगियों के इलाज में दूसरी दवाओं के साथ किया जाता है। इस खबर के चलते स्टॉक में ये तेजी आई।
एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के गठन के बाद डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। बीएसई के सर्कुलर के मुताबिक डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज की स्विट्जरलैंड इकाई ने जमैका में एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज जमैका लिमिटेड गठन किया है। ये कंपनी दवाओं के आयात, भंडारण, वितरण और निर्यात का कारोबार करेगी।
एबॉट इंडिया, टोरेंट फार्मा, डिवीज लैब, ग्लैंड फार्मा, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मा, ग्रैन्यूल्स, अल्केम लैब, सन फार्मा, सिप्ला, ज़ाइडस लाइफसाइंसेज, नैटको फार्मा, लॉरस लैब्स, आईपीसीए लैब्स, बायोकॉन और सनोफी जैसी दूसरी फार्मा कंपनियों के शेयरों भी शुक्रवार को 3 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली है।
ये रही तेजी की सबसे बड़ी वजह
बताते चलें की अमेरिकी बाजार में तमाम दवाएं पेटेंट के दायरे से बाहर होने वाली हैं। इनकी अमेरिकी फार्मा बाजार में बड़ी हिस्सेदारी है। इन दवाओं के पेटेंट के दायरे से बाहर निकलने का मतलब है कि अब कोई भी कंपनी लाइसेंस लेकर इनकी कॉपी या जेनरिक वर्जन बना सकती है। यह खबर भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए पॉजिटिव खबर है। कल फार्मा शेयरों आई तेजी में इस खबर का भी अहम योगदान रहा।
सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Systematix Institutional Equities) ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका में पेटेंट के दायरे से बाहर हो चुकी दवाओं के एक बड़े पूल में या तो जेनेरिक दवाओं से प्रतिस्पर्धा है ही नहीं, या फिर सीमित प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में इन दवाओं के जेनरिक वर्जन बनाने वाली कंपनियों के लिए अमेरिकी कारोबार में विस्तार के बड़े मौके हैं। इससे भारतीय कंपनियों के लिए इन दवाओं के जेनरिक कारोबार में विस्तार का बड़ा मौका हो सकता है। इन कंपनियों को नई जेनेरिक मंजूरियां मिलने से मौजूदा मंजूरियों की एक्सपायरी की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर हम मान लें कि भारतीय जेनेरिक कंपनिया इन पेटेंट के दायरे से बाहर हुई दवाओं की कॉपी करने में सफल हो जाती हैं तो इससे भारतीय कंपनियों को 125.0 करोड़ डॉलर की कमाई हो सकती है।