इक्विटी मार्केट के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती ब्याज की उच्च दरें और फिक्सड इनकम पर मिल रही ऊंची ब्याज है। इसकी वजह से इक्विटी मार्केट का वैल्यूशन सीमित होता है। इसके साथ ही इक्विटी मार्केट में इक्विटी की लागत में भी बढ़त होती है। ये बातें मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में यूटीआई एएमसी के कार्यकारी वीपी और फंड मैनेजर-इक्विटी वी श्रीवास्तव (V Srivatsa) ने कही हैं। इक्विटी रिसर्च और फंड मैनेजमेंट का 18 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले वी श्रीवास्तव का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर इस समय काफी अच्छा लेग रहा है। इस सेक्टर हायर नेट इंटरेस्ट मार्जिन, कर्ज की बढ़ती मांग और कम कर्ज लागत का फायदा मिलेगा।
इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि बैंकिंग सेक्टर के वैल्यूशन इस समय फेयर लेवल पर दिख रहे हैं। ये अपने लंबी अवधि के औसत के मुताबिक ही है। वहीं, पिछले साल आई गिरावट के बाद अब आईटी सेक्टर का वैल्यूशन भी अच्छे हो गए हैं।
क्या आप अगले वित्तीय वर्ष में भारत सहित विश्व स्तर पर काफी उतार-चढ़ाव की उम्मीद करते हैं? अगले वित्तीय वर्ष में इक्विटी बाजारों के लिए प्रमुख चुनौतियां क्या रहेंगी?
इस सवाल का जवाब देते हुए वी श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़त का ग्लोबल मार्केट पर बड़ा असर देखने को मिलेगा। अमेरिका में तय होने वाली ब्याज दर भारत में विदेशी पैसे के प्रवाह की दशा और दिशा तय करेगी। ग्लोबल बाजार में वोलैटिलिटी बढ़ने का असर भारत पर भी देखने को मिलेगा, क्योंकि हम ग्लोबल मार्केट के साथ काफी नजदीकी से जुड़े हुए हैं। दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार अभी भी महंगा नजर आ रहा है। हालांकि हाल के दिनों में दूसरे बाजारों की तुलना में भारतीय बाजारों का प्रीमियम कम हुआ है। लेकिन अभी भी ये तुलनात्म रूप से महंगा है। उन्होंने आगे कहा कि इक्विटी मार्केट के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती ब्याज की उच्च दरें और फिक्सड इनकम पर मिल रही ऊंची ब्याज है।
क्या भारत को वर्तमान जियो-पोलिटिकल स्थिति से फायदा होगा?
इस पर बात करते हुए वी श्रीवास्तव ने कहा कि इससे भारत को कुछ मायनों में फायदा हो सकता है। निवेशक राजनीतिक रूप से स्थिर बाजारों में निवेश करना चाहते हैं। भारतीय बाजारों को इसका फायदा मिल सकता है। लेकिन ये भी देखने को मिलता है कि अगर कोई बड़ा जियो-पोलिटिकल तनवा बहुत लंबे समय तक खिंचता है तो निवेशकों में जोखिम से बचने को प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है। ये ग्लोबल खासकर उभरके इक्विटी बाजारों के लिए अच्छी बात नहीं है।
क्या आपको आने वाले महीनों में ऑटो सेक्टर में और करेक्शन आने की उम्मीद है?
इस सवाल के जवाब में वी श्रीवास्तव ने कहा कि वे मध्यम अवधि के नजरिए से ऑटो सेक्टर को लेकर पॉजिटिव नजरिया रखते हैं। इस सेक्टर में लागत में बढ़ोतरी का निगेटिव असर देखने को मिला। इससे सेक्टर की मांग और मार्जिन पर दबाव देखने को मिला है। लेकिन अब कमोडिटी की कीमतों में गिरावट के चलते ऑटो सेक्टर पर बढ़ती लागत का दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही ऑटो सेक्टर का वैल्यूएशन भी अपनी लंबी अवधि के औसत के नीचे आ गया है जो इस सेक्टर को आकर्षक बनाता है।
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