Daily Voice : रिफोलियो इन्वेस्टमेंट्स एंड जर्मिनेट (Refolio Investments and Germinate) के फाउंडर और मैनेजिग पार्टनर संतोष जोसेफ का कहना है कि बैंकिंग,फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी शेयरों के फिर से तेजी पकड़ने और लार्जकैप की वापसी से अगले साल (संवत 2080) में बाजार में तेजी आती दिखेगी। मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा कि इस दिवाली और अगली दिवाली के बीच आम चुनाव होने वाले है। आम तौर पर हमें ये देखने को मिलता है कि चुनावों के आसपास, छह महीने पहले और छह महीने बाद, बाजार काफी जोश में रहते हैं । ऐसे में आगले 1 साल के पिछले एक साल की तुलना में बेहतर रहने की उम्मीद दिख रही है।
बताते चलें कि संतोष जोसेफ को एसेट मैनेजमेंट, बैंकिंग और बीमा सेक्टर का 20 सालों से ज्यादा का अनुभव है। 2024 के आम चुनावों पर बात करते हुए संतोष जोसेफ ने कहा कि वर्तमान स्थितियों को देखते हुए लगता है कि वर्तमान सरकार की ही सत्ता में फिर से वापसी कर सकती है।
बाजार पर बात करते हुए उन्होंने आग कहा कि बाजार अगले एक साल में निवेशकों अच्छा रिटर्न दे सकता है। 2023 कैलेंडर ईयर अब तक काफी हद तक ऐसा साल रहा है जहां पिछले छह से आठ महीनों में ही रिटर्न आया है। इसमें भी लार्जकैप मौन रहे हैं। मिड, स्मॉल कैप और ब्रॉडर मार्केट ने ही रिटर्न दिया है। उम्मीद है कि अब लॉर्जकैप वापसी करते दिखेंगे। साथ ही बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और कुछ हद तक आईटी जैसे बड़े सेक्टर अब तेजी का रुख पकड़ सकते हैं। ऐसे में अगले 1 साल बाजार के लिए अच्छे रहने की उम्मीद दिख रही है।
विदेशी संस्थागत निवेश की स्थिति पर बात करते हुए संतोष ने कहा कि अगर यूएसफेड की दरों में बढ़ोतरी थम जाती है तो फिर भारत में बड़े पैमाने पर एफआईआई निवेश आ सकता है। विदेशी निवेशक चीन से बाहर निकल रहे हैं। इसका फायदा भारत को मिलेगा। भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था, और मांग में मजबूती का फायदा मिलेगा। ग्लोबल लेवल पर ब्याज दरों में नरमी आने से भारत में एफआईआई निवेश में बढ़त होगी।
इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि मध्य पूर्व में संकट ने ग्लोबल मार्केट को और भी ज्यादा वोलेटाइल बना दिया है। बाजार इस जियोपोलिटिकल मुद्दे के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा है। डर इस बात का है इजराइल और हमास का ये संघर्ष कहीं पूरे मध्य-पूर्व में न फैल जाए। इसलिए हमें सावधानी बरतनी होगी। इस संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तेल की कीमतों पर नजर रखने की जरूरत है।
एचडीएफसी बैंक पर बात करते हुए संतोष ने कहा कि बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे उतने खराब नहीं थे, जितने कि बैंक के शेयरे गिरे हैं। लीडर शिप में बदलाव और एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी का मर्जर ही एक बड़ा जोखिम था जो अब बीत चुका है। बैंक के पास पहले से ही मजबूत लीडरशिप है। मर्जर की गतिविधि भी सुचारु रूप से चल रही है। कभी-कभी बड़ी और मजबूत कंपनियों के शेयरों में भी महीनों और सालों तक कोई हलचल नहीं होती। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनी का कारोबार अच्छा नहीं है। ऐसे कंपनियां जब तेजी पकड़ती तो फिर तूफानी गति से भागती हैं।
संतोष ने आगे कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्यूफैक्चरिंग सर्विसेज इंड्स्ट्री को देश में बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिल रहा है। इस सेक्टर को चाइना+1 पॉलिसी, आत्म निर्भर या मेक इन इंडिया पर जोर से फायदा मिलने की उम्मीद है। विभिन्न पीएलआई स्कीमों से भी इस सेक्टर को ताकत मिल रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्यूफैक्चरिंग सर्विसेज सेक्टर लंबी अवधि के नजरिए से बहुत अच्छा लग रहा है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।