Daily Voice: पिछले साल के रूस-यूक्रेन युद्ध और बढ़ती महंगाई के बाद अब वित्त वर्ष 2024 में हमारे सामने नए तरह के जोखिम खडे़ हैं जिनको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। पिछले 1 साल में ब्याज दर में हुई बढ़ोतरी थोड़े अंतराल के बाद अपना असर दिखाएगी। ये बातें क्वेस्ट इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स (Quest Investment Advisors) के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफीसर अनिरुद्ध सरकार (Aniruddha Sarkar)ने मनीकंट्रोल के साथ हुए बातचीत में कही हैं। उन्होंने आगे कहा कि उनको नहीं लगता कि विकसित बाजारों में महंगाई को नियंत्रित किया जा सकेगा। बढ़ती महंगाई से विकसित देशों की घरेलू बचत दर में गिरावट आएगी। ऐसे में अगर निकट की अवधि में बाजार में कमजोरी और अस्थिर बनी रहे तो ये कोई अजीब बात नहीं होगी।
यूएस फेड महंगाई को नियंत्रित करने में बुरी तरह से असफल रहा
कैपिटल और फाइनेंशियल मार्केट का 15 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले अनिरुद्ध सरकार का कहना है कि यूएस फेड महंगाई को नियंत्रित करने में बुरी तरह से असफल रहा। अमेरिका में महंगाई की नकेल कसने के चक्कर में बैंकों की बैलेंस सीट खराब हुई है। अगर स्थिति से निपटने के लिए सही समय पर सही कदम नहीं उठाए गए तो वहां बहुत बड़ा वित्तीय संकट उत्पन्न हो सकता है। अनिरुद्ध सरकार का मानना है कि महंगाई अपने आप स्वाभाविक तौर पर सामान्य स्तर पर लौट आएगी। यूएस फेड को महंगाई पर फोकस करने की जगह इकोनॉमिक ग्रोथ और मजबूत बैंकिंग फाइनेंशियल सिस्टम बनाने पर फोकस करना चाहिए।
क्या आपको लगता है कि कैपटिल गुड्स और घरेलू कंज्यूमर गुड्स के निवेश में अच्छे मौके दिख रहे हैं?
इस सवाल का जवाब देते हुए अनिरुद्ध ने कहा कि वे इस समय होटल, ब्रांडेड परिधान, ट्रेवेल एसेसरीज जैसे हायर एंड अर्बन खपत से जुड़े सेक्टर को लेकर ज्यादा बुलिश हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण भारत की डिमांड में रिकवरी के साथ ही खपत से जुड़े कुछ शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। इस सेक्टर को कमोडिटी की कीमतों में गिरावट का भी फायदा मिलेगा।
सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के क्वालिटी बैंकों में अपना निवेश बनाए रखें
बैंकिंग सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका में बैंकिंग सेक्टर में आए संकट के चलते भारत सहित पूरी दुनिया भर में इस सेक्टर को लेकर डर पैदा हो गया है। लेकिन भारत का बैंकिंग सेक्टर बुनियादी तौर पर काफी मजबूत है। हाल के दिनों में NPA के लेवल और प्रॉविजनिंग कॉस्ट में भी गिरावट देखने को मिली थी। ऐसे में हम बैंकिग शेयर को लेकर पॉजिटिव हैं। निवेशकों को सलाह है कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के क्वालिटी बैंकों में अपना निवेश बनाए रखें।
अदाणी ग्रुप के शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से अदाणी ग्रुप के शेयरों में काफी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। लेकिन उनके निवेश पैमाने में न आने की वजह से उन्होंने इस ग्रुप के शेयरों में निवेश नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा कि हाल के दिनों में अदाणी ग्रुप के शेयरों को लेकर उठे विवाद को लेकर वो कमेंट करने की स्थिति में नहीं हैं। लेकिन उनका ये भी मानना है कि कंपनी का मैनेजमेंट स्थितियों से निपटने के लिए सही कदम उठा रहा है।
RBI को फेड की नीतियों की नकल करने से बचने की सलाह
अमेरिका में बैंकिंग सेक्टर में उत्पन्न सकंट पर उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि RBI को फेड की नीतियों की नकल न करते हुए अपने पॉलिसी डिसीजन खुद लेने चाहिए। RBI को यह बात समझना चाहिए कि इस समय भारत में ग्रोथ की ज्यादा जरूरत है। ऐसे में महंगाई को रोकने को ज्यादा तरजीह न देकर उच्च ब्याज दरों से बाहर निकलने की जरूरत है। अगर देश में ब्याज दरों की दर ऊंची बनी रहती है तो हाउसिंग सेक्टर पर दबाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि उनको उम्मीद है कि आगे होने वाली MPC मीट में RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर न्यूट्रल रवैया अपनाएगा।
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