चुनाव से पहले अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट की संभावना, भारत में भी हो सकता है करेक्शन : आशिका ग्लोबल के अमित जैन

Daily Voice: आशिका ग्लोबल के अमित जैन को लगता है कि चुनाव से पहले अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट की संभावना है जिसके कारण भारत में करेक्शन देखने को मिलेगा। इसके बावजूद अमित जैन को दिसंबर 2024 तक निफ्टी के 25,000 पर पहुंचने की उम्मीद है

अपडेटेड Jun 29, 2024 पर 6:25 PM
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Daily Voice: अमित ने कहा कि इस समय आईटी सेक्टर, ऑयल पीएसयू और तमाम चुनिंदा पीएसयू बैंक लंबी अवधि के नजरिए से थोड़े अंडर वैल्यूड दिख रहे हैं

Daily Voice :आशिका ग्लोबल फैमिली ऑफिस सर्विसेज के को-फाउंडर अमित जैन को लगता है कि दिसंबर 2024 तक निफ्टी के 25,000 पर पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन, उन्होंने मनीकंट्रोल के साथ एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि अमेरिकी चुनाव से पहले अमेरिकी बाजार में तेज गिरावट की संभावना बहुत ज्यादा है, जिसका भारतीय शेयर बाजारों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज इंडस्ट्री में 18 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले मार्केट दिग्गज अमित का मानना ​​है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में पेश किए जा सकने वाले केंद्रीय बजट में ग्रामीण आबादी और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ाने के उपायों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।

क्या आपको लगता है कि बाजार में तेजी समाप्त हो चुकी है, या आप अभी भी निफ्टी को करेक्शन मोड में आने से पहले 25,000 पर जाते देख रहे हैं?


इस सवाल को जवाब में अमित ने कहा कि उन्होंने 18 अगस्त, 2023 को मनीकंट्रोल के साथ एक बातचीत में कहा था कि दिसंबर 2024 तक निफ्टी 25,000 के लक्ष्य को हासिल कर लेगा। यह एक कॉन्ट्रा-बुलिश कॉल था क्योंकि उस समय चारों तरफ भारतीय और ग्लोबल मार्केट को लेकर हर कोई मंदी की बात कर रहा था। अमित ने कहा कि उस बातचीत में उन्होंनें यह भी कहा थी बैंकिंग सेक्टर, आईटी और दूसरे सेक्टर्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करेगा। ये बातें अब सच साबित हो रही हैं क्योंकि बैंक निफ्टी ने नया हाई छुआ है। आज की स्थिति को देखते हुए निफ्टी का दिसंबर 2024 का लक्ष्य 25000 पर कायम है।

क्या आपको फाइनेंशियल सेक्टर में कोई जोखिम नजर आ रहा है?

पिछले महीने, हमें सभी बैंकिंग स्टॉक्स में शानदार रैली देखने को मिली है। भारतीय बॉन्ड्स के 28 जून, 2024 को जेपी मॉर्गन इमर्जिंग मार्केट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की उम्मीद ने फाइनेंशियल शेयरों में जोश भर दिया है। यह समावेशन ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में थाईलैंड, पोलैंड और चेक गणराज्य के वेटेज को प्रभावित करेगा। यह भारतीय बाजार के लिए बहुत अच्छा संकेत है। इसके चलते हमे बैंक निफ्टी और ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स में एक करेक्शन देखने को मिल सकता है। साथ ही, इस बात की भी बहुत ज्यादा संभावना है कि अमेरिकी चुनाव से पहले अमेरिकी बाजार में तेज करेक्शन हो सकता। इसके चलते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है।

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क्या हमें अब टेक्नोलॉजी शेयरों में धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करनी चाहिए?

इस सवाल के जवाब में अमित ने कहा कि इस समय आईटी सेक्टर, ऑयल पीएसयू और तमाम चुनिंदा पीएसयू बैंक लंबी अवधि के नजरिए से थोड़े अंडर वैल्यूड दिख रहे हैं। इस समय परंपरागत सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर्स की तुलना में ब्लॉकचेन में एआई पर फोकस करने वाली मिडकैप और स्मॉलकैप आईटी कंपनियां निवेश के नजरिए से ज्यादा बेहतर दिख रही हैं। लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करने वाले निवेशकों इन शेयरों में धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करनी चाहिए। साथ ही, कुछ अच्छी क्वालिटी के ऑयल पीएसयू और बैंक शेयर जो लगभग 1 से 1.5 के प्राइस टू बुक वैल्यू पर ट्रेड कर रहे हैं मध्यम से लंबी अवधि के नजरिए से अच्छे नजर आ रहे हैं। अमित का मानना ​​है कि मोदी 3.0 में पेट्रोलियम उत्पादों के जीएसटी के अंतर्गत आने की बहुत ज्यादा संभावना है।

 

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