Union Budget 2026: डेटा सेंटर फोकस में रहने की उम्मीद, इन स्टॉक्स पर रहेगी नजर

Buget 2026: डेटा-सेंटर लीजिंग रेवेन्यू इस दशक के अंत तक पांच गुना बढ़कर 8 अरब डॉलर होने का अनुमान है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और AdaniConneX जैसी बड़ी घरेलू कंपनियां 2030 तक कुल कैपेसिटी में 35-40 प्रतिशत योगदान कर सकती हैं

अपडेटेड Jan 31, 2026 पर 6:07 PM
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Budget 2026 रविवार, 1 फरवरी को सुबह 11 बजे पेश होगा।

बजट 2026 के तहत होने वाले ऐलानों के दौरान डेटा सेंटर फोकस में रहने की उम्मीद है। क्लाउड को अपनाने, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस और बढ़ते डेटा कंजंप्शन के कारण इस सेक्टर में मजबूत स्ट्रक्चरल ग्रोथ जारी है। डेटा सेंटर, एनर्जी का बेहद ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसलिए इंडस्ट्री के लोग बिजली की अच्छी उपलब्धता, ग्रीन एनर्जी तक पहुंच और आसान फाइनेंसिंग पर पॉलिसी सपोर्ट चाहते हैं। हालांकि डेटा सेंटर्स से सीधे तौर पर जुड़ी कंपनियों, लिस्टेड डेटा-सेंटर ऑपरेटर्स की संख्या सीमित है, लेकिन मौके और लंबी अवधि की मांग पर मजबूत विजिबिलिटी को देखते हुए मार्केट के लोग आशावादी बने हुए हैं।

CRISIL रेटिंग्स की एक हालिया रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत के डेटा-सेंटर ऑपरेटर्स का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2028 तक 20-22 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़कर लगभग 20,000 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसे एंटरप्राइज और कंज्यूमर्स द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल और हाइपरस्केल क्लाउड प्रोवाइडर्स से बढ़ती मांग का सपोर्ट है। इस मांग को पूरा करने के लिए मार्च 2028 तक इंस्टॉल्ड कैपेसिटी लगभग दोगुनी होकर 2.3-2.5 गीगावाट होने की उम्मीद है।

CRISIL का मानना है कि इस सेक्टर के विस्तार के लिए 3 मुख्य फैक्टर जिम्मेदार हैं- एंटरप्राइजेज द्वारा पब्लिक क्लाउड सर्विसेज को तेजी से अपनाया जाना, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस में बढ़ते निवेश, और 5G का रोलआउट। 5G, वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स सर्विसेज जैसे लो-लेटेंसी एप्लिकेशन की मांग को बढ़ा रहा है।


2030 तक पांच गुना बढ़ जाएगी भारत की डेटा-सेंटर कैपेसिटी

नवंबर 2025 की जेफरीज की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि भारत की डेटा-सेंटर कैपेसिटी 2030 तक पांच गुना बढ़कर लगभग 8 गीगावाट हो जाएगी। इसका मतलब है कि अगले 5 सालों में लगभग 6.4 GW नई कैपेसिटी जोड़ी जाएगी। इस विस्तार के लिए फैसिलिटीज पर पूंजीगत खर्च में अनुमानित 30 अरब डॉलर की जरूरत होगी। प्रति मेगावाट 40-50 लाख डॉलर की सामान्य निर्माण लागत आएगी। डेटा-सेंटर लीजिंग रेवेन्यू इस दशक के अंत तक पांच गुना बढ़कर 8 अरब डॉलर होने का अनुमान है।

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किन शेयरों पर रहेगी नजर

रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और AdaniConneX जैसी बड़ी घरेलू कंपनियां 2030 तक कुल कैपेसिटी में 35-40 प्रतिशत योगदान कर सकती हैं। जेफरीज का कहना है कि बढ़ते डेटा ट्रैफिक, AI को अपनाने में वृद्धि, डेटा-लोकलाइजेशन के सख्त नियम, मुंबई और चेन्नई जैसे हब में लगभग फुल ऑक्यूपेंसी इस सेक्टर की गति को बनाए हुए हैं। इसके चलते निवेशक इस थीम में निवेश के लिए इससे जुड़े और पूरे इकोसिस्टम के प्लेयर्स को देख रहे हैं। इनमें भारती एयरटेल (नेक्स्ट्रा डेटा), टाटा कम्युनिकेशंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज (जियो प्लेटफॉर्म्स) और रियल एस्टेट डेवलपर अनंत राज जैसे ऑपरेटर और प्लेटफॉर्म प्लेयर्स शामिल हैं। साथ ही लार्सन एंड टुब्रो और KEC इंटरनेशनल जैसी इंजीनियरिंग और EPC फर्में भी हैं।

ABB इंडिया, कमिंस इंडिया, किर्लोस्कर ऑयल इंजन्स और हिताची एनर्जी जैसे पावर और बैकअप सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स, साथ ही ब्लू स्टार और वोल्टास जैसे कूलिंग सॉल्यूशन स्पेशलिस्ट, इस सेक्टर के विस्तार से संभावित लाभार्थी माने जा रहे हैं। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि 1 फरवरी को यूनियन बजट की घोषणा के दौरान ये स्टॉक फोकस में रहेंगे।

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