Get App

23000 से नीचे फिसला Nifty तो बढ़ सकता है सेलिंग प्रेशर, नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं तगड़ी कमाई

Nifty लगातार 5 हफ्तों से गिरावट के साथ बंद हुआ है और अगस्त के पीक से 6 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुका है। भूराजनीतिक तनाव का बढ़ना, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे बाहरी कारण निवेशकों की धारणा पर असर डाल रहे हैं

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Sep 13, 2026 पर 12:04 PM
23000 से नीचे फिसला Nifty तो बढ़ सकता है सेलिंग प्रेशर, नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं तगड़ी कमाई
Nifty अपने मुख्य शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेजेस से नीचे ट्रेड कर रहा है।

निफ्टी के लिए 23,000–23,100 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है और आने वाले हफ्ते में इस लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उनका कहना है कि कुल मिलाकर मार्केट का स्ट्रक्चर कमजोर बना हुआ है। निफ्टी 50 अपने हालिया हाई 24,774 से काफी नीचे आ गया है, लेकिन 23,000 के लेवल के नीचे जाने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने निफ्टी 50 को लेकर और क्या संभावना जताई, नए शुरू हो रहे सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडियाज क्या हैं, आइए जानते हैं...

क्या आपको उम्मीद है कि Nifty 50 अगले हफ्ते 23,000 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना रहेगा, या इस बात की ज्यादा संभावना है कि इंडेक्स इस सपोर्ट के नीचे चला जाएगा?

23,000-23,100 का जोन Nifty के लिए एक अहम सपोर्ट एरिया है और आने वाले हफ्ते में इस लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि इंडेक्स अपने हालिया हाई 24,774 से तेजी से नीचे आया है, लेकिन 23,000 के नीचे जाने (ब्रेकडाउन) की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इस जोन की अहमियत को देखते हुए, इन लेवल के आसपास कुछ कंसोलिडेशन या खरीदारी का रुझान दिख सकता है। हालांकि, कुल मिलाकर मार्केट का स्ट्रक्चर कमजोर बना हुआ है। Nifty लगातार 5 हफ्तों से गिरावट के साथ बंद हुआ है और अगस्त के पीक से 6 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुका है।

इंडेक्स अपने मुख्य शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेजेस से नीचे ट्रेड कर रहा है, मोमेंटम इंडिकेटर लगातार कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। डेली RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) 'ओवरसोल्ड' जोन में आ गया है और वीकली RSI भी नीचे की ओर जा रहा है, जो पॉजिटिव मोमेंटम की कमी को दिखाता है। इसके अलावा, भूराजनीतिक तनाव का बढ़ना, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे बाहरी कारण निवेशकों की धारणा पर असर डाल रहे हैं। इससे बीच-बीच में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ रहा है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें