Defence Stocks: शिपबिल्डिंग पर बढ़ रहा जोर, इन 3 सरकारी डिफेंस कंपनियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा; जानिए डिटेल
Defence Stocks: भारत में शिपबिल्डिंग सेक्टर पर तेजी से जोर बढ़ रहा है। 70,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ घरेलू जहाज निर्माण को नई रफ्तार मिल रही है। इससे तीन सरकारी डिफेंस कंपनियों के सामने बड़े अवसर खुल सकते हैं। इन शेयरों पर नजर रखना फायदे का सौदा हो सकता है। जानिए डिटेल।
Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) भारत सरकार की नवरत्न कंपनी है।
Defence Stocks: देश की शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री धीरे धीरे निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है। हमारा करीब 90 प्रतिशत व्यापार अभी भी विदेशी जहाजों के जरिए होता है। यही वजह है कि भारत लंबे समय तक ग्लोबल सप्लाई चेन के उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील रहा है।
हालांकि, अब घरेलू निर्माण पर जोर काफी तेजी से बढ़ रहा है। अब Make in India पहल के तहत 70,000 करोड़ रुपये के निवेश ने घरेलू जहाज निर्माण को नई रफ्तार दी है। इससे भारतीय शिपयार्ड कंपनियों के सामने अगले कई वर्षों में बड़े मौके खुल सकते हैं। आइए जानते हैं कि किन तीन सरकारी डिफेंस कंपनियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है।
Mazagon Dock Shipbuilders
Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) भारत सरकार की नवरत्न कंपनी है। यह देश का इकलौती सरकारी डिफेंस शिपयार्ड है, जो डेस्ट्रॉयर और पारंपरिक पनडुब्बियां बनाता है। कंपनी एक साथ 11 पनडुब्बियां और 10 युद्धपोत बनाने की क्षमता रखती है।
MDL रक्षा और कमर्शियल दोनों सेगमेंट के लिए जहाज बनाती है। इसके पोर्टफोलियो में डेस्ट्रॉयर, पनडुब्बियां, स्टील्थ फ्रिगेट, कॉर्वेट और मिसाइल बोट शामिल हैं। इसके अलावा कंपनी कार्गो वेसल, मल्टीपर्पज सपोर्ट वेसल, टग, ड्रेजर और वाटर टैंकर जैसे कमर्शियल जहाज भी बनाती है।
तेल क्षेत्र में भी कंपनी की मजबूत मौजूदगी है। यह ऑफशोर प्लेटफॉर्म, जैक अप रिग और सबसी पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। ONGC के लिए चल रहे प्रोजेक्ट्स MDL के ऑर्डर बुक का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा हैं। कुल 6,524 करोड़ रुपये के इन प्रोजेक्ट्स में से 4,374 करोड़ रुपये के काम अभी बाकी हैं।
कमर्शियल शिपिंग सेगमेंट में कंपनी को NAVI MERCHANTS से छह मल्टीपर्पज हाइब्रिड पावर्ड वेसल बनाने का 715 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इसमें से 638 करोड़ रुपये का काम अभी पूरा होना बाकी है।
31 दिसंबर 2025 तक MDL की कुल ऑर्डर बुक 23,758 करोड़ रुपये थी। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ऑर्डर बुक में गिरावट आई है और FY21 के करीब 49,700 करोड़ रुपये से यह घटकर अब इस स्तर पर आ गई है।
आने वाले समय की ऑर्डर पाइपलाइन भी मजबूत दिख रही है। सरकार ने Project-75I के तहत छह नई पनडुब्बियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कीमत करीब 70,000 करोड़ रुपये है। इसके अलावा Kalvari क्लास की तीन और पनडुब्बियों का ऑर्डर भी आने की संभावना है।
इसके साथ ही P-17B फ्रिगेट प्रोजेक्ट (70,000 करोड़ रुपये) और P-18 डेस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट (85,000 करोड़ रुपये) जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी आने वाले वर्षों में तय हो सकते हैं।
मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीने (9MFY26) के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 11 प्रतिशत बढ़कर 9,156 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 4.4 प्रतिशत घटकर 1,883 करोड़ रुपये रहा और मार्जिन 20.6 प्रतिशत रहा। शुद्ध लाभ लगभग स्थिर रहा और 2,081 करोड़ रुपये के आसपास रहा।
Garden Reach Shipbuilders & Engineers
Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) रक्षा मंत्रालय के अधीन एक सरकारी कंपनी है। इसका मुख्य कारोबार भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के लिए युद्धपोत और सपोर्ट वेसल बनाना है।
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 18,482 करोड़ रुपये थी, जिसमें 10 प्रोजेक्ट और 42 प्लेटफॉर्म शामिल हैं। हाल के महीनों में पहली बार ऑर्डर बुक 20,000 करोड़ रुपये से नीचे आई है। मैनेजमेंट इसे तेज प्रोजेक्ट निष्पादन का संकेत मानता है।
कंपनी की कुल ऑर्डर बुक का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा रक्षा प्रोजेक्ट्स से आता है। इसमें P-17 Alpha फ्रिगेट प्रोजेक्ट अकेले 46 प्रतिशत योगदान देता है।
GRSE के मुताबिक अगले 12-18 महीनों में रक्षा और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के ऑर्डर का अवसर मौजूद है। कंपनी करीब 33,000 करोड़ रुपये के पांच जहाजों के प्रोजेक्ट में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। यह कॉन्ट्रैक्ट FY26 के अंत तक साइन होने की उम्मीद है। अगर यह डील पूरी होती है तो कंपनी की ऑर्डर बुक FY26 के अंत तक लगभग 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
GRSE अपनी क्षमता भी तेजी से बढ़ा रही है। फिलहाल GRSE एक साथ 28 जहाज बना सकती है और 2026 तक इसे बढ़ाकर 35 जहाज करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कोलकाता और गुजरात में नए प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं।
मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में कंपनी का रेवेन्यू 42 प्रतिशत बढ़कर 4,883 करोड़ रुपये रहा। ऑपरेटिंग प्रॉफिट 200 करोड़ रुपये से बढ़कर 440 करोड़ रुपये हो गया। वहीं शुद्ध लाभ 57 प्रतिशत बढ़कर 445 करोड़ रुपये रहा।
Cochin Shipyard
सरकारी डिफेंस कंपनी Cochin Shipyard Limited (CSL) जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और मरीन इंजीनियरिंग सेवाओं में काम करती है। कंपनी रक्षा और कमर्शियल दोनों क्षेत्रों के लिए जहाज बनाती है।
भारत का कमर्शियल शिपबिल्डिंग बाजार हर साल लगभग 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये का अवसर देता है। इसमें कंटेनर जहाज, कोस्टल शिपिंग, ड्रेजर, फेरी, क्रूज और ऑयल गैस कैरियर जैसे सेगमेंट शामिल हैं। 2047 तक भारतीय कंपनियां 437 जहाज खरीदने की योजना बना रही हैं। इनकी कुल कीमत करीब 2.23 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
CSL ने दक्षिण कोरिया की HD Hyundai Heavy Industries के साथ साझेदारी की है, ताकि LNG जैसे हाई टेक जहाज बनाने की तकनीक हासिल की जा सके। कंपनी भविष्य में KSOE के साथ 50:50 जॉइंट वेंचर के जरिए नया शिपयार्ड बनाने की योजना भी बना रही है।
CSL की मौजूदा ऑर्डर बुक करीब 23,000 करोड़ रुपये है। कंपनी को CMA से छह LNG पावर्ड कंटेनरशिप बनाने का 3,240 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है।
इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए पांच नेक्स्ट जेनरेशन सर्वे वेसल बनाने की 5,000 करोड़ रुपये की परियोजना में भी कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनी है। अगर यह ऑर्डर मिलता है तो कंपनी की ऑर्डर बुक 28,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। कंपनी के सामने कुल 94,000 करोड़ रुपये की संभावित ऑर्डर पाइपलाइन मौजूद है।
मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में CSL का रेवेन्यू 8 प्रतिशत बढ़कर 3,093 करोड़ रुपये रहा। हालांकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट 26 प्रतिशत घटकर 456 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 23 प्रतिशत घटकर 427 करोड़ रुपये रहा।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
भारत का 70,000 करोड़ रुपये का शिपबिल्डिंग मिशन अब धीरे धीरे जमीन पर उतरता दिख रहा है। ऑर्डर पाइपलाइन मजबूत है, कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं और घरेलू शिपयार्ड बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए तैयार हो रहे हैं।
हालांकि मौजूदा वैल्यूएशन में इस सेक्टर को लेकर काफी उम्मीदें पहले से शामिल हो चुकी हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए फिलहाल इन कंपनियों पर नजर बनाए रखना और सही मौके का इंतजार करना समझदारी हो सकती है।
Disclaimer:यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।