Defrail Tech IPO Listing: 28% प्रीमियम पर एंट्री, फिर नीचे आया ₹74 का शेयर, नई खरीदारी से पहले चेक करें ये डिटेल्स

Defrail Tech IPO Listing: डिफ्रेल टेक रबर के पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाती है। अब इसके शेयर लिस्ट हुए हैं और इसके आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था। इसके आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी हुए हैं। चेक करें कंपनी की कारोबारी सेहत कैसी है और आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कैसे करेगी?

अपडेटेड Jan 19, 2026 पर 4:10 PM
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Defrail Tech IPO Listing: डिफ्रेल टेक का ₹14 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 9-13 जनवरी तक खुला था। आज इसके शेयरों की लिस्टिंग हुई है।

Defrail Tech IPO Listing: रबर के पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाने वाली डिफ्रेल टेक के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 105 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹74 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹95.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 11% का लिस्टिंग गेन (Defrail Tech Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। ₹99.75 की ऊंचाई तक पहुंचने के बाद टूटकर यह ₹90.25 (Defrail Tech Share Price)  के लोअर सर्किट पर आ गया और इसी पर बंद भी हुआ यानी कि पहले कारोबारी दिन की समाप्ति पर आईपीओ निवेशक 21.96% मुनाफे में हैं।

Defrail Tech IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

डिफ्रेल टेक का ₹14 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 9-13 जनवरी तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 105.54 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 71.09 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 160.95 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 101.28 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 18,60,800 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹7.96 करोड़ इक्विपमेंट/मशीनरी की खरीदारी में, ₹1.73 करोड़ सोलर पैनल की खरीदारी और इंस्टॉलेशन और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।


Defrail Tech के बारे में

अक्टूबर 2023 में बनी डिफ्रेल टेक रबर के पार्ट्स और कंपोनेंट्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल ऑटोमोटिव, रेलवेज और डिफेंस जैसी इंडस्ट्रीज में होता है। मुख्य रूप से इसका कारोबारी मॉडल बी2बी है। साथ ही यह बी2जी मॉडल के तहत इंडियन रेलवेज और डिफेंस को भी माल सप्लाई करती है। इस कंपनी की शुरुआत मूल रूप से वर्ष 1980 में विकास रबर इंडस्ट्रीज के बनने से हुई। वर्ष 2008 में बी2बी ग्राहकों के लिए इंपेक्स हाईटेक रबर बना। फिर 1 अप्रैल 2024 को दोनों को मिलाकर डिफ्रेल टेक बनाया गया। इसके दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हरियाणा के फरीदाबाद में हैं। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में डीजल और पेट्रोलियम होज पाइप, एलपीजी होज पाइप, नायलॉन ट्यूब, गैस्केट, ग्रूमेट्स, एयर इनटेक होज, ईबीडीएम प्रोफाइल्स, स्पांजेज, और एलुमिनियम विंडो रबर बीडिंग्स हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 में इसका शुद्ध मुनाफा रॉकेट की स्पीड से बढ़कर ₹11 लाख से ₹3.42 करोड़ और टोटल इनकम भी ₹72 लाख से उछलकर ₹62.22 करोड़ पर पहुंच गया। अब इस वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो पहली छमाही अप्रैल-सितंबर 2025 में कंपनी को ₹1.51 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹39.08 करोड़ की टोटल इनकम हासिल हो चुकी है। सितंबर 2025 के आखिरी में कंपनी पर ₹11.78 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹5.46 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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