Semaglutide Patent Dispute: दिल्ली हाईकोर्ट ने डेनमार्क की दवा कंपनी Novo Nordisk की मशहूर एंटी-डायबिटिक और एंटी-ओबेसिटी दवा Semaglutide से जुड़े पेटेंट विवाद में अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने Dr. Reddy’s Laboratories और OneSource Specialty Pharma को भारत में इस दवा की बिक्री और मार्केटिंग से रोक दिया है। हालांकि, उन्हें ऐसे देशों में अपनी दवा निर्यात की अनुमति दी है, जहां Novo Nordisk का पेटेंट लागू नहीं है।
Semaglutide को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Ozempic और Wegovy ब्रांड नामों से बेचा जाता है। ये टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के इलाज में क्रांतिकारी मानी जाती है। पिछले कुछ साल के दौरान वैश्विक बाजार में इनकी बिक्री तेजी से बढ़ी है।
न्यायमूर्ति अमित बंसल की अदालत में 29 मई को पारित आदेश के मुताबिक, दोनों भारतीय कंपनियों ने यह भरोसा दिया है कि वे 19 अगस्त 2025 को अगली सुनवाई तक भारत में दवा की बिक्री नहीं करेंगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता Novo Nordisk की इस दलील को भी रिकॉर्ड पर लिया कि भारतीय कानून के तहत पेटेंट उल्लंघन वाले उत्पाद का निर्यात भी उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
क्या है पेटेंट का पूरा मामला
यह विवाद उस समय उठा जब Dr. Reddy’s ने दिसंबर 2024 में मिले लाइसेंस के आधार पर अप्रैल 2025 से Semaglutide का निर्माण शुरू किया, जबकि भारत में इसकी बिक्री के लिए उसे अब तक लाइसेंस नहीं मिला है। कंपनी इस दवा को ऐसे देशों में निर्यात करने की योजना बना रही है, जहां पेटेंट की वैधता नहीं है।
Dr. Reddy’s ने Moneycontrol को दिए एक बयान में कहा कि कंपनी के पास semaglutide के जनरिक संस्करण के निर्माण की पूरी क्षमता है और वह इसे 2026 से भारत और अन्य बाजारों में लॉन्च करने की तैयारी में है। कंपनी को उम्मीद है कि FY27 से यह दवा उसकी राजस्व वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगी।
OneSource का बिजनेस क्या है?
OneSource Specialty Pharma बेंगलुरु स्थित एक कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गनाइजेशन (CDMO) है। यह अन्य फार्मा कंपनियों के साथ मिलकर semaglutide के जनरिक संस्करण की मैन्युफैक्चरिंग में लगी हुई है।
इस बीच, Novo Nordisk ने पुष्टि की है कि वह अगले कुछ हफ्तों में भारत में Wegovy ब्रांड के तहत Semaglutide लॉन्च करने जा रही है। कंपनी ने अपनी दवा को इससे पहले भी भारतीय बाजार में लॉन्च करने की कोशिश की थी, लेकिन ग्लोबल डिमांड और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी अड़चन के चलते उसे अपना फैसला टालना पड़ा था।
वजन घटाने की दवा का बढ़ता बाजार
भारत में मोटापा कम करने वाली दवाओं का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। Pharmatrac के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 तक यह बाजार ₹133 करोड़ का था, जो कुछ ही वर्षों में बढ़कर ₹576 करोड़ पर पहुंच गया — यानी करीब चार गुना की छलांग।
इस तेज वृद्धि के पीछे सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) की बड़ी भूमिका है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी अकेले ₹397 करोड़ की है। यह इसके अन्य प्रतिस्पर्धियों जैसे लिराग्लूटाइड (Liraglutide) और डुलाग्लूटाइड (Dulaglutide) की तुलना में कहीं अधिक है।