Delta Corp के शेयर हुए क्रैश, सरकार के एक फैसले से 20% टूटा स्टॉक; जानिए क्या है पूरा मामला
सरकार की ओर से Delta Corp से मांगा गया टैक्स पेमेंट कंपनी के पिछले 10 वर्षों के रेवेन्यु के दोगुने से भी अधिक है। हालांकि राहत की बात यह है कि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है। नोटिस में कहा गया है कि अगर कंपनी ब्याज और जुर्माने सहित टैक्स का पेमेंट करने में नाकाम रहती है तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा
Delta Corp Share Price: कैसीनो चलाने वाली कंपनी डेल्टा कॉर्प के लिए सोमवार, 25 सितंबर बहुत खराब रहा। मार्केट खुलते ही शेयरों में जबरदस्त बिकवाली शुरू हो गई और कंपनी के शेयर देखते ही देखते 20% टूटकर 140.20 रुपए पर आ गए। यह शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का निचला स्तर और साथ ही 33 माह का लो है। कारोबार के दौरान डेल्टा कॉर्प में लोअर सर्किट लगा। हालांकि बाद में यह कुछ हद तक जरूर संभले। आइए जानते हैं कि शेयरों में कोहराम क्यों मचा। Delta Corp पर 11,140 करोड़ रुपये का GST बकाया होने का आरोप है। इसे लेकर कंपनी को टैक्स नोटिस जारी किया जा चुका है। नोटिस में सरकार की ओर से कंपनी को 11140 करोड़ रुपये के टैक्स के अलावा ब्याज और जुर्माना मिलाकर 16,822 करोड़ रुपये भरने को कहा गया है।
Delta Corp पर बकाया GST जुलाई 2017 से लेकर मार्च 2022 तक की अवधि का है। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर 25 सितंबर को शुरुआती कारोबार में पहले 15 प्रतिशत और बाद में 20 प्रतिशत तक टूट गए। सुबह स्टॉक BSE पर गिरावट के साथ 157.75 रुपये पर खुला। कारोबार खत्म होने पर BSE पर शेयर 18.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 143 रुपये पर सेटल हुआ। NSE पर यह लाल निशान में 157.90 पर खुला और लगातार गिर रहा था। इस इंडेक्स पर शेयर ने 140.35 रुपये का 52 सप्ताह का लो टच किया और बाद में 17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 145.65 रुपये पर सेटल हुआ।
मांगा गया पेमेंट 10 वर्षों के रेवेन्यु के दोगुने से भी अधिक
सरकार की ओर से डेल्टा कॉर्प से मांगा गया टैक्स पेमेंट कंपनी के पिछले 10 वर्षों के रेवेन्यु के दोगुने से भी अधिक है। हालांकि राहत की बात यह है कि कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है। वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज के क्रांति बथिनी कहते हैं कि शॉर्ट टर्म इंपैक्ट को छोड़ दें तो 16,822 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मीडियम टर्म में भी एक बड़ा निगेटिव है। इसके अलावा यह ऐसे वक्त में आया है, जब कंपनी पहले से सख्त नियमों के चलते मुश्किलों से जूझ रही है। इसकी क्षमताएं बाधित हुई हैं, जिसका उदाहरण है कि डेल्टा कॉर्प का दमन कैसीनो प्रस्ताव कई वर्षों से लंबित है।
हालांकि यह आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि भारत में कैसीनो लाइसेंसिंग को नियंत्रित करने वाले नियम कई कारणों से चुनौतीपूर्ण हैं। केएस लीगल के सोनम चंदवानी कहते हैं, “सबसे पहले, भारत में जुआ कानून मुख्य रूप से राज्य का मामला है, जिसके कारण विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियम और आवश्यकताएं होती हैं। दूसरा, जुए के प्रति ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता है, जिसके कारण सतर्क और प्रतिबंधात्मक नीतियां बनाई गई हैं।''
28% GST ने दिया सबसे बड़ा झटका
मोटे अमाउंट के टैक्स नोटिस को देखते हुए डेल्टा कॉर्प के शेयरों में बड़ी गिरावट आने की आशंका है। कंपनी पहले से जिन मुश्किलों से जूझ रही है, उनकी बात करें तो एक महीने पहले इसके मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) ने इस्तीफा दे दिया था। दो महीने पहले कंपनी ने जानकारी दी थी कि उसके ऑनलाइन गेमिंग कारोबार के आईपीओ को फिलहाल रोक दिया गया है। सबसे बड़ा झटका जीएसटी काउंसिल का जुलाई में आया फैसला बना है। इस साल जुलाई में जीएसटी काउंसिल ने फैसला किया था कि गेमिंग कंपनियों को ग्राहकों से कमाए पैसों पर 28 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना होगा। काउंसिल ने ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो और घुड़दौड़ पर दांव के पूरे अंकित मूल्य पर 28 प्रतिशत की दर से कर लगाने का फैसला किया है।
इस कदम से Delta Corp समेत अन्य गेमिंग कंपनियां पहले से मुश्किलों का सामना कर रही हैं। गेमिंग ऐप मोबाइल प्रीमियर लीग ने अगस्त माह में कहा था कि जीएसटी काउंसिल के नए फैसले के तहत टैक्स का बढ़ा बोझ वहन करने के चलते 350 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। जुलाई 2023 से अब तक Delta Corp का शेयर करीब 29 प्रतिशत टूटा है। कंपनी की वैल्यूएशन 47000 करोड़ रुपये है।
डेल्टा कॉर्प ने टैक्स नोटिस के बारे में जानकारी देते हुए बताया है कि क्लेम किया गया जीएसटी अमाउंट जुलाई 2017 से मार्च 2022 तक कैसीनो में खेले गए सभी गेम्स की ग्रॉस बेट वैल्यू पर बेस्ड है, जबकि नया जीएसटी नियम अक्टूबर 2023 से लागू हुआ है। नोटिस में कहा गया है कि अगर कंपनी ब्याज और जुर्माने सहित टैक्स का पेमेंट करने में नाकाम रहती है तो उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। कंपनी ने कहा है कि ग्रॉस गेमिंग रेवेन्यु के बजाय ग्रॉस बेट वैल्यू पर जीएसटी की मांग पूरी इंडस्ट्री के लिए एक इश्यू है और सरकार को पहले ही इस बारे में कई रिप्रेजेंटेशंस दिए जा चुके हैं। डेल्टा कॉर्प ने अपनी एक्सचेंज फाइलिंग में कहा है, "कंपनी को कानूनी रूप से सलाह दी गई है कि कर की मांग मनमानी और कानून के विपरीत है। कंपनी ऐसी कर मांग और संबंधित कार्यवाही को चुनौती देने के लिए उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का पालन करेगी।"
फ्यूचर को लेकर क्या है राय
एक विश्लेषक का कहना है कि जो चीज डेल्टा कॉर्प के लिए मामले को मजबूत बनाती है, वह एशिया की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट वकीलों में से एक जिया मोदी हैं। जिया मोदी की शादी डेल्टा कॉर्प के प्रमोटर जयदेव मोदी से हुई है। साल 2010 में जिया और उनके पति ने ने डेल्टा कॉर्प में प्रमोटर के कॉन्ट्रीब्यूशन के तौर पर 70 करोड़ रुपये लगाए थे। जिया भारत की अग्रणी लॉ फर्मों में से एक, AZB & Partners की को-फाउंडर हैं। जहां तक कंपनी की वित्तीय हालत की बात है तो पिछले पांच वर्षों में डेल्टा कॉर्प की बिक्री 11 प्रतिशत और शुद्ध लाभ 13 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं। विश्लेषकों का मानना है कि नया जीएसटी नियम एक हालिया झटका है, लेकिन लॉन्ग टर्म में कंपनी को लेकर पॉजिटिविटी बरकरार है। कंपनी भारतीय कैसीनो उद्योग में दबदबा रखती है। जिन्हें कंपनी की चुनौतियों से निपटने की क्षमता में विश्वास है, उनके लिए मौजूदा गिरावट शेयर खरीदारी का मौका है।
डेल्टा कॉर्प के ओवरऑल शेयरहोल्डिंग पैटर्न से पता चलता है कि संस्थागत निवेशक भी डेल्टा कॉर्प पर दांव लगा रहे हैं। संस्थागत निवेशकों की कंपनी में होल्डिंग मार्च तिमाही के 5.35 प्रतिशत से बढ़कर जून 2023 को समाप्त तिमाही में 6.68 प्रतिशत हो गई। इसी अवधि के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों की होल्डिंग 14.50 प्रतिशत से बढ़कर 18.04 प्रतिशत हो गई। इतना ही नहीं तमाम मुश्किलों के बावजूद कंपनी गोवा में विस्तार कर रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में एक नया वैसल शुरू होने वाला है, जो Deltin Caravela को रिप्लेस करेगा और कंपनी की मौजूदा क्षमता को 2.5 गुना बढ़ाएगा। वहीं जब दमन का कैसीनो शुरू हो जाएगा तो डेल्टा कॉर्प और भी फायदे में रहेगी।