मिड, स्मॉल और माइक्रो कैप में मार्च में आई गिरावट के बाद मार्केट के जानकारों ने कहा था कि पैसा इन स्टॉक्स से निकलकर लार्जकैप में जाएगा। इसकी वजह यह बताई गई कि लार्जकैप की वैल्यूएशंस अपेक्षाकृत कम है। कुछ पॉकेट्स में ऐसा होते दिख रहा है। कैपिटल गुड्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के स्टॉक्स से इसका संकेत मिलता है। इस बीच, स्मॉल और मिडकैप स्टॉक्स में फिर से रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी दिखने लगी है। अमीर निवेशकों (HNI) की सोच स्पष्ट है-मिडकैप-स्मॉलकैप में अपना निवेश बनाए रखें। लेकिन, नई खरीदारी नहीं करें। मार्च तिमाही के नतीजों पर मार्केट की करीबी नजरें होंगी। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 5 अप्रैल को लंबे समय बाद बिकवाली की। इसे अभी ट्रेड मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन, ऐसे वक्त जब FII निवेश करने में बहुत सावधानी बरत रहे हैं, घरेलू संस्थागत निवेशकों का सपोर्ट नहीं मिलने से मार्केट के सेंटिमेंट पर असर पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी के प्रोडक्शन और सेल्स का डेटा शानदार है। कंपनी ने हाल में कीमतें बढ़ाई है, जिसका असर उसके मार्च तिमाही के नतीजों पर दिखेगा। Antique के मुताबिक, कम ग्लोबल सप्लाई की वजह से कंपनी हाई बनी रह सकती हैं। उधर, बेयर्स की दलील है कि MOIL के स्टॉक ने बीते 14 सालों में निवेशकों को मालामाल किया है। हालांकि, पिछले चार साल में रेवेन्यू की ग्रोथ सीमित दायरे में रही है।
डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्पयूट्स रिड्रेसल कमीशन (DCDRC) ने इंश्योरेंस से जुड़े एक मामले में फैसला कंपनी के पक्ष में दिया है। बुल्स का कहना है कि कंपनी का स्टॉक FY24 की तीसरी तिमाही में 26 फीसदी चढ़ा है। Sheela Foam ने आस्ट्रेलिया में अपनी क्षमता बढ़ाई है। इससे कंपनी की वॉल्यूम बढ़ने की उम्मीद है। बेयर्स का कहना है कि दिसंबर तिमाही में कंपनी के नतीजें अच्छे नहीं रहे। Ikea जैसे कुछ दूसरे होम डेकोर के आउटलेट्स बढ़ने से शीला फोम के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है।
कंपनी बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड में 21 एकड़ जमीन लेने जा रही है। इसके लिए वह 450 करोड़ रुपये की कीमत चुकाएगी। इसका इस्तेमाल रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए होगा। बुल्स का कहना है कि बेंगलुरु में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट स्ट्रॉन्ग बना हुआ है। कई एनालिस्ट्स ने Prestige Estates के शेयरों के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। डोमेस्टिक फंड्स इस स्टॉक में लगातार निवेश बढ़ा रहे हैं। बेयर्स की दलील है कि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में साल दर साल आधार पर कंपनी के रेवेन्यू में 23 फीसदी गिरावट आई है। इसकी बड़ी वजह प्रोजेक्ट पूरे होने में देर है। हालांकि, एक साल में यह स्टॉक तीन गुना हो गया है।
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