Stock markets:घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले पंद्रह कारोबारी सत्रों में घरेलू शेयर बाजारों में करीब 10000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। जानकारों का कहना की ये बाजार की सरपट दौड़ के बाद हुई मुनाफावसूली है। ये मुनाफावसूली इस साल अप्रैल में शुरू हुई मजबूत और व्यापक आधार वाली रैली के बाद आई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों से पता चला है कि 28 जून से आज तक, डीआईआई ने भारतीय इक्विटी मार्केट में 10378 करोड़ रुपये की बिकवाली की हो। डीआईआई ने पिछले पंद्रह में से 11 कारोबारी सत्रों में नेट सेलिंग की है। यह बिकवाली सेंसेक्स और निफ्टी के रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद आई है।
अप्रैल की शुरुआत से, दोनों अहम इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 14 फीसदी से ज्यादा उछले हैं, जबकि बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप 24 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं। जून में अमेरिकी महंगाई दर के दो साल से अधिक समय में सबसे धीमी गति से बढ़ने के बाद भारतीय बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। इससे यह अनुमान लगाया गया कि फेडरल रिजर्व अपने ब्याज दर बढ़त चक्र की समाप्ति के करीब हो सकता है। सेंसेक्स 66000 अंक के स्तर के ऊपर पहुंच गया है। जबकि निफ्टी 19500 अंक के पार चला गया है।
डीआईआई कर रहे मुनाफावसूली
बाजार जानकारों का कहना है कि शेयर बाजारों में हालिया उछाल के डीआईआई कुछ मुनाफा अपनी जेब में रख रहे हैं। बाजार का फिर से आकर्षक होने और एक दो करेक्शन के बाद वे फिर से इस पैसे बाजार में डालने को रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त इस बिक्री में म्यूचुअल फंडों के ग्राहकों द्वारा मुनाफा वसूली के लिए किए जाने वाले रिडेम्प्शन का भी योगदान हो सकता है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के विनोद नायर का कहना है कि इस साल के शुरुआती हिस्से में जब बाजार का रुझान कमजोर था तब डीआईआई की बड़ी खरीदारी से ही बाजार को सपोर्ट मिला था। लेकिन अब एफआईआई और खुदरा निवेशकों ने वह भूमिका ले ली है। जबकि डीआईआई रणनीतिक रूप से मुनाफावसूली कर रहे हैं। पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए सही समय पर बिक्री भी जरूरी होती है।
गौरतलब है कि अप्रैल 2023 के बाद से डीआईआई की खरीदारी कम हो गई है। अप्रैल में उन्होंने केवल 2216.57 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि मई में वे 1107.58 करोड़ रुपये के नेट सेलर रहे। जून में उन्होंने करीब 4458 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
एफपीआई की तरफ से जोरदार खरीदारी
बाजार जानकारों का कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) एफपीआई की तुलना में एक अगल पैटर्न पर काम कर रहे हैं। जब एफपीआई बेच रहे थे तब डीआईआई ने खरीदारी की। लेकिन अब स्थिति उलट गई है, डीआईआई बेच रहे हैं जबकि एफपीआई खरीदार में बदल गए हैं। 1 अप्रैल से एफपीआई भारतीय इक्विटी मार्केट में नेट बॉयर रहे हैं। इस अवधि में इन्होंने भारतीय बाजार में कुल 15.94 अरब डॉलर की खरीदारी की है।
लंबे नजरिए से डीआईआई और एफआईआई दोनों ही नेट बॉयर
प्रभुदास लीलाधर के विक्रम कसाट का कहना है कि यह सच है कि डीआईआई बिकवाली कर रहे हैं। लेकिन इसके विपरीत एफआईआई ने इस साल 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी की है। हमें अक्सर ये देखने को मिलता कि जब एफआईआई खरीदते हैं, डीआईआई बकवाली करते हैं। लेकिन अगर हम व्यापक नजरिए से देखें तो डीआईआई भी लॉन्ग साइड में ही दिख रहे हैं। ये हमारे बाजार के लिए बड़े फायदे की बात है क्योंकि दोनों ही खरीदारी की होड़ में हैं।
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