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स्मॉलकैप स्पेस में एकतरफा रैली की उम्मीद नहीं, लंबे नजरिए से क्ववालिटी शेयरों पर करें फोकस -एक्सपर्ट्स

कई फंड मैनेजरों का कहना है कि 2020 और 2024 के बीच आए जोरदार उछाल, कम बेस इफेक्ट और लिक्विडिटी के कारण स्मॉल कैप्स स्टॉक्स महंगे हो गए हैं। ऐसे में हमें अगले कुछ सालों तक हमें इस स्पेस में चुनिंदा क्वालिटी शेयरों पर ही फोकस करने की रणनीति पर काम करना होगा

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Feb 18, 2026 पर 9:02 AM
स्मॉलकैप स्पेस में एकतरफा रैली की उम्मीद नहीं, लंबे नजरिए से क्ववालिटी शेयरों पर करें फोकस -एक्सपर्ट्स
फंड मैनेजरों ने कहा कि स्मॉल कैप के लिए अगले फेज़ में लिक्विडिटी से ज्यादा अहम कंपनी-स्पेसिफिक फंडामेंटल्स होंगे

अहमदाबाद में हुए मनीकंट्रोल म्यूचुअल फंड समिट के दौरान फंड मैनेजरों ने कहा कि हाल के सालों में आई तेजी और हाल की भारी गिरावट,दोनों देखने के बाद ऐसा लगता है कि स्मॉल-कैप स्टॉक अब एक ऐसे दौर में आ रहे हैं,जहां सोच-समझकर स्टॉक चुनना और सब्र रखना ही नतीजे तय करेंगे। वैल्यूएशन के ऊंचे लेवल से करेक्ट होने और अर्निंग की रफ़्तार धीमी होने के साथ, अब पहले की तरह एक तरफा तेज़ी की उम्मीद नहीं है। ऐसे में हमें बाजार में समझदारी भरे फैसले लेने की जरूरत है।

टाटा AMC के सीनियर फंड मैनेजर चंद्रप्रकाश पडियार, ICICI प्रूडेंशियल AMC के सीनियर फंड मैनेजर इहाब दलवई, और HSBC म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजमेंट इक्विटीज की SVP चीनू गुप्ता ने इस समिट में कहा कि 2020 और 2024 के बीच आए तेज उछाल कम बेस इफेक्ट और लिक्विडिटी की वजह से स्मॉल कैप ने काफी अच्छा रिटर्न दिया। लेकिन अब अगले कुछ सालों तक हमें इस स्पेस में अच्छे भाव पर मिल रहे चुनिंदा क्वालिटी शेयरों पर ही फोकस करने की रणनीति पर काम करना होगा।

पडियार ने कहा कि 2021 से 2024 का समय असामान्य था क्योंकि इस दौरान स्मॉल-कैप यूनिवर्स में अर्निंग में छोटे बेस से तेज बढ़त देखने को मिली, जिससे बड़े पैमाने पर तेजी देखने को मिली। 2024 में वैल्यूएशन बहुत ज़्यादा हो गए। इसको देखते हुए टाटा स्मॉल कैप फंड ने जून 2023 से एकमुश्त निवेश लेना बंद कर दिया और पिछले दो सालों से कंज़र्वेटिव नजरिया बनाए रखा है।

स्मॉलकैप स्पेस में एकतरफा रैली की उम्मीद नहीं

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