मार्केट्स (Stock Markets) पिछले तीन महीनों से लगातार गिर रहे हैं। इनवेस्टर्स बाजार के डायरेक्शन को लेकर उलझन में हैं। दुनियाभर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने और महंगाई में उछाल ने इनवेस्टर्स की चिंता बढ़ा दी है। Elliott Wave के एक्सपर्ट रोहित श्रीवास्तव का कहना है कि बाजार में और गिरावट आ सकती है। कैपिटल और फाइनेंशियल मार्केट्स के बारे में उन्होंने मंनीकंट्रोल से खुलकर बातचीत की।
श्रीवास्तव ने कहा कि अप्रैल से जून के बीच हमने मार्केट में गिरावट का लंबा दौर देखा है। जून के अंत में हमें संकेत मिल रहा था कि बाजार में बहुत ज्यादा बिकवाली हो चुकी है। जून के अंत में FIIs का इंडेक्स फ्यूचर्स पॉजिशन करीब 1,45,000 कॉन्टैक्ट्स के शॉर्ट पॉजिशन तक पहुंच गया था। यह कोरोना की महामारी के बाद से सबसे ज्यादा है। आम तौर पर जब ऐसे प्वाइंट पर पहुंच जाते हैं, जहां ट्रेडर्स ने इतना ज्यादा शॉर्ट किया हो तो बीच में आपको शॉर्ट कवरिंग की वजह से टेक्निकल रैली दिखती है। इसलिए छोटी अवधि में शॉर्ट कवरिंग रैली की उम्मीद है। इसलिए मुझे मार्केट में तुरंत गिरावट की आशंका नहीं दिखती।
उन्होंने कहा कि अगले एक महीना में मार्केट में अचानक रैली देखने को मिल सकती है। उसके बाद हमें देखना होगा कि यह तेजी कहां तक जाती है। अगर आप अप्रैल के 18,150 के टॉप से 15,150-15,180 का बॉटम देखे तो 50 फीसदी रिट्रेसमेंट का स्तर करीब 16,660 होगा। 61 फीसदी रिट्रेसमेंट पर यह 17,000 होगा। इसलिए आने वाले महीने में यह तेजी 16,600 से 17,000 तक जा सकती है। अगर हम इस लेवल से आगे नहीं निकलते हैं तो हम अगली गिरावट की उम्मीद कर सकते हैं। अभी सबसे खराब स्थिति में मार्केट अप्रैल 2021 के स्तर तक जा सकता है, जो 14,200 के करीब है। इसका मतलब है कि अगर हम 17,000 पार नहीं करते हैं तो गिरकर 14,200 तक जा सकते हैं।
रुपया में गिरावट के बारे में श्रीवास्तव ने कहा कि बहुत छोटी अवधि में डॉलर-रुपया का RSI (Relative Strength) करीब 78-79 है। 80 के ऊपर जाने पर शॉर्ट-टर्म करेक्शन दिखाई देता है। इसलिए अगर बाजार में अच्छी तेजी आती है तो डॉलर-रुपया का एक्सचेंज रेट थोड़ा बेहतर हो सकता है। हो सकता है रुपया 50 पैसे या एक रुपया मजबूत हो जाए। लेकिन, उसके बाद 80.7-80.8 की संभावान दिखाई देती है। उसके बाद रुपया 85 के स्तर तक जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मैं सोचता था कि एफआईआई कि बिकवाली, ऑयल में उछाल और करेंट अकाउंट डेफिसिट के बावजूद रुपया क्यों 77 के स्तर से नीचे नहीं जा रहा है। जब RBI ने मई में इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू किया तो मुझे लगा कि अब वह हस्तक्षेप नहीं करेगा। आरबीआई ने संकेत दिया था कि उसकी नजर मार्केट फोर्सेज पर है। वह इंटरेस्ट रेट से जुड़ी अपनी पॉलिसी से रुपया को उसका स्तर पर जाने देना चाहता है। यही वजह है कि आप डॉलर-एक्सचेंज रेट में तेज उतार-चढ़ाव देख रहे हैं। दरअसल, रुपया बाजार के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर रहा है।