अगले 20 साल सिर्फ Navi के लिए, कभी नहीं सोचा था Flipkart बेचूंगा: सचिन बंसल

नावी के बारे बात करते हुए सचिन बंसल ने कहा कि नावी शब्द नेवीगेटर का शॉर्ट फॉर्म है

अपडेटेड Sep 01, 2021 पर 9:06 AM

अपने पहले वेंचर फ्लिपकार्ट (Flipkart) को छोड़ने के बाद सचिन बंसल ने दिसंबर 2018 में अपने दोस्त अंकित अग्रवाल के साथ मिलकर नावी टेक्नोलीज (Navi Technologies) की स्थापना की। नावी टेक के ऑफिस में आप सचिन बंसल को कंपनी के कर्मचारियों के साथ बिना किसी तड़क-भड़क या अलग केबिन के अपने लैपटॉप पर काम करते देख सकते हैं।

नावी का हेड क्वार्टर बेंगलुरु के कोरामंगला के उसी इलाके में है, जहां 15 साल पहले कभी सचिन और बिन्नी बंसल ने फिल्पकार्ट की स्थापना की थी। बता दें कि फ्लिपकार्ट आगे चलकर देश की लीडिंग ई-कॉमर्स कंपनी बनी।  
 
मनी कंट्रोल से बात करते हुए सचिन ने कहा कि उन्होंने कभी भी इस बात की कल्पना नहीं की थी कि वो फ्लिपकार्ट को छोड़ देंगे। अब वे नावी को अगले दो दशक में देश का फाइनेंशियल सर्विसेज दिग्गज बनाने पर काम कर रहे हैं।

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सचिन बंसल का कहना है कि कोई बैंक अकेले दम पर अरबों भारतीयों को सभी सेवाएं नहीं उपलब्ध करा सकता है। इस स्थति में नावी जैसी कंपनियों की जरूरत है। नावी लेंडिंग जनरल इंश्योरेंस, म्यूचुएल फंड, माइक्रो फाइनेसिंग के काम में हैं। इसके साथ यह यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए मंजूरी का भी इंतजार कर रही है। कंपनी ने माइक्रो फाइनेंस इंश्योरेंस और म्यूचुअल में कदम रखने के लिए कई अधिग्रहण किए हैं। कंपनी अपनी इन-हाउस बनाई गई नई टेक्नोलजी के दम पर एक बैंक भी बनाना चाहती है।

मनी कंट्रोल से इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि उनका बैंक परंपरागत बैंकों की तुलना में भिन्न होगा। उन्होंने इस बातचीत में ये भी कहा कि उनको फ्लिपकार्ट में बहुत कुछ सीखने को मिला और भारत आगे चलकर दुनिया की टैलेंट फैक्ट्री बनेगा। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि देश में डिजिटल टेक्नोलॉजी को तेजी से मंजूरी मिल रही है। देश में अब दूरदराज के इलाकों में भी डिजिटल सिग्नेचर के दम पर इन- होम लोन्स लिये जा सकते हैं। फिजिकल वर्क का स्थान पूरी तरह से डिजिटल वर्क लेता नजर आ रहा है। माइक्रो फाइनेंस में भी हम लोगों को भुगातन के लिए फोन पे और गूगल पे का उपयोग करते देख रहे हैं। यह एक अच्छा संकेत है।

नावी के बारे बात करते हुए उन्होंने कहा कि नावी शब्द नेवीगेटर का शॉर्ट फॉर्म है। नावी के जरिए हम देश में आम लोगों के फाइनेंशियल नेवीगेटर बनना चाहते हैं। चूंकि फाइनेंशियल सर्विस काफी जटिल होती है, ऐसे में आपको एक रास्ता दिखाने वाले या नेवीगेटर की जरूरत होती है। नावी यही काम करेगा।


उन्होंने कहा कि कंपनी का कारोबार धीरे-धीरे जोर पकड़ रहा है। कंपनी के पास कुछ लाख ग्राहक हैं। अभी हम फ्लिपकार्ट का आकार हासिल करने से बहुत दूर हैं। हम अपने कारोबार के लिए इन-हाउस टेक्नोलॉजी डेवलप कर रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि नावी को नए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म किया जा रहा है। यह आने वाली 20 साल की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगी । हमारे ऐप में कोई मैनुअल इंटरवेंशन नहीं होगा। आदि से अंत तक लोन की प्रक्रिया 20 मिनट में डिजिटल तरीके से पूरी होगी।

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माइक्रो फाइनेंसिंग में अभी तक तमाम काम अभी तक फिजिकल तौर पर ही होते हैं। हम इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए फोकस कर रहे हैं। बंसल ने आगे कहा कि अगर कोविड के प्रभाव को छोड़ दिया जाए तो हम काफी अच्छी स्थिति में है। स्थितियां सामान्य हो रही हैं। माइक्रो फाइनेंस और हमारे दूसरे कारोबार में हमारा कलेक्शन अब तक की सबसे बेहतर स्थिति में है।

बंसल ने आगे बताया कि हमने अब तक 900 करोड़ रुपये ज्यादा के कर्ज का वितरण किया है। हमारा लोन और माइक्रो फाइनेंसिग का कारोबार काफी बड़ा हो गया है। इसका आकार 200 करोड़ रुपए प्रति महीने का हो गया है। अगर माइक्रो फाइनेंस और नए लेंडिग प्रोडक्ट्स को शामिल कर लिया जाए तो हम इस समय 350 करोड़ रुपये का लोन वितरण कर रहे हैं।

इस समय हम अपने को सिर्फ फिनटेक कंपनी ना कहकर अपनी तुलना बैंकों और एनबीएफसी से कर रहे हैं। हम अपने को फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनी कहलाना पसंद नहीं करते। क्योंकि तमाम फिनटेक कंपनियों की अपना कोई लोन बुक नहीं होता। जबकि हमारे पास अपना निजी लोन बुक है।

इस बातचीत के अंत में उन्होंने कहा कि नावी (Navi Technologies)कारोबार में नया है। लेकिन हम इसको लेकर काफी उत्साहित हैं। अगर आरबीआई हमको बैंकिंग लाइसेंस देता है तो हम देश के लिए कुछ ऐसा विकसित करने पर कठोर परिश्रम करेंगे जो देश ही नहीं पूरी दुनिया के लिए नया और अभूतपूर्व होगा।


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