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बाजार में एक्सपायरी डे के उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए और उपायों पर गौर कर सकता है सेबी

शेयर बाजार में 13 दिसंबर को काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान सूचकांक में भारी गिरावट थी, लेकिन बाद में यह 1,950 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार में एक्सपायरी वाले दिनों में तेज उतार-चढ़ाव काफी आम हो गया है। सेबी (SEBI) के होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि सेबी इस बात का आकलन करेगा कि इस तेज उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त उपाय करने की जरूरत है?

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 13, 2024 पर 11:06 PM
बाजार में एक्सपायरी डे के उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए और उपायों पर गौर कर सकता है सेबी
लॉट साइज में बदलाव 1 जनवरी से लागू होंगे। इसका मकसद बाजार में स्थायित्व को बढ़ावा देना है।

शेयर बाजार में 13 दिसंबर को काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान सूचकांक में भारी गिरावट थी, लेकिन बाद में यह 1,950 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार में एक्सपायरी वाले दिनों में तेज उतार-चढ़ाव काफी आम हो गया है। सेबी (SEBI) के होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कहा कि सेबी इस बात का आकलन करेगा कि इस तेज उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त उपाय करने की जरूरत है?

मुंबई में IFTA 2024 के मौके पर उन्होंने कहा, 'एक्सपायरी वाले दिनों में रिटेल ट्रेडर्स को होने वाले नुकसान के अलावा ट्रेडिंग वॉल्यूम की वजह से ढांचागत जोखिम भी बढ़ जाता है। लिहाजा, हमने एक्सपायरी वाले दिन इस उथल-पुथल को रोकने के लिए खास तौर पर इंडेक्स ऑप्शंस के तहत कई कदम उठाए हैं। इन कदमों के नतीजों के आधार पर हम रेगुलेटरी मोर्चे पर और कदम उठाने पर विचार करेंगे।'

ट्रेडर्स ने बताया कि गुरुवार को और शुक्रवार को जब निफ्टी और सेंसेक्स के वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी होती है, तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव काफी तेज रहता है। जहां तक वॉल्यूम का सवाल है, तो शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि 21 नवंबर से उपायों के अमल में आने के बाद से एक्सचेंजों में वॉल्यूम में 25-35 पर्सेंट की गिरावट देखने को मिली है। बहरहाल, साफ तौर पर इसका असर 1 दिसंबर से देखने को मिला, जब पहले हफ्ते में तीन तक कोई एक्सपायरी नहीं थी।

लॉट साइज में बदलाव 1 जनवरी से लागू होंगे। इसका मकसद बाजार में स्थायित्व को बढ़ावा देना है। नारायण का कहना था कि इसके बाद रिटेल ट्रेडिंग और नुकसान पर सेबी के उपायों का पूरा असर दिखेगा। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग के मामले में सेबी किस तरह के उपाय कर सकता है।

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