FCNR(B)Deposit Scheme : RBI ने समय से एक महीने पहले यानी 31 अगस्त से ही NRIs के लिए FCNR डिपॉजिट विंडो बंद करने का एलान किया है। स्कीम को शानदार रिस्पॉन्स के चलते 13 अगस्त तक बैंकों को अब तक 52 बिलियन डॉलर से ज्यादा के डिपॉडिट मिल चुके हैं। FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम की डेडलाइन 30 सितंबर की जगह अब 31 अगस्त कर दी गई है। इस स्कीम को शानदार रिस्पॉन्स के चलते समय से पहले बंद किया गया है।
इस स्कीम पर नजर डालें तो स्वैप फैसिलिटी के जरिए 13 अगस्त तक 57 अरब डॉलर आए हैं। FCNR डिपॉजिट स्कीम से ही 52 अरब डॉलर से ज्यादा के डिपॉजिट आए हैं। FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम में तेज रफ्तार इनफ्लो देखने को मिला है। पहले 20 अरब डॉलर आने में 38 दिन लगे। वहीं, दूसरे 20 अरब डॉलर आने में सिर्फ 14 दिन लगे। पिछले 13 दिनों में 16 अरब डॉलर का इनफ्लो देखने को मिला। ऐसा मानना है कि इस महीने के अंत तक इनफ्लो की रफ्तार और बढ़ेगी।
एक्सपर्ट्स और इकोनॉमिस्ट की राय है कि अगस्त अंत तक FCNR (B) डिपॉजिट से 65-75 अरब डॉलर का इनफ्लो संभव है। कुल मिलाकर 80-100 अरब डॉलर का इनफ्लो संभव है। SBI रिसर्च ने पहले अनुमान लगाया था कि अगर FCNR-B रूट के ज़रिए निवेश की सुविधा सितंबर तक खुली रहती है, तो 70 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है, जो 2013 में आए निवेश के स्तर से कहीं ज्यादा होगा।
FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम और रुपया
बड़े डॉलर इनफ्लो के बाद भी रुपए में ज्यादा मजबूती नहीं आई है। RBI ने इनफ्लो का बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट बनाने में लगाया गया। एक पूर्व सेंट्रल बैंकर ने इस अचानक होने वाले क्लोजर होने की वजह रुपये पर पड़ रहे दबाव को बताया है। उनका कहना है पहले के विपरीत, इस बार USD/INR करेंसी पेयर स्थिर रहा है, लेकिन इसमें लगातार गिरावट का रुझान बना हुआ है। खबर है कि RBI रुपये की गिरावट को रोकने के लिए पिछले कुछ दिनों से डॉलर बेच रहा है।
उन्होंने कहा 5 जून और 14 अगस्त के बीच रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिला। 5 जून को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.39 पर बंद हुआ था और 14 अगस्त तक यह लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 95.45 पर आ गया। इनफ्लो शुरू होने के बाद, जुलाई के मध्य में रुपये में थोड़ी रिकवरी हुई और यह 94.30 पर पहुंच गया, लेकिन उसके बाद इसकी रफ़्तार धीमी पड़ गई। हाल के हफ्तो में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार बढ़त और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से रुपया कमजोरर हुआ है। साथ ही, फ़ॉरवर्ड्स मार्केट में ऐसी हलचल नहीं दिख रही है जिससे RBI के लिए इकोनॉमिक हेजिंग आसान हो सके। इसलिए, शायद RBI ने गोल्ड बॉन्ड की तरह ही इसे अभी बंद कर देना ही बेहतर समझा होगा।
FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से बैंक डिपॉजिट पर पड़ा बड़ा असर
FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से बैंक डिपॉजिट पर बड़ा असर पड़ा है। 15 जून से 31 जुलाई के बीच टाइम डिपॉजिट में 8.5 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसमें FCNR डिपॉजिट का करीब 3-3.5 लाख करोड़ रुपए का योगदान रहा है। SBI रिसर्च के मुताबिक अगस्त में टाइम डिपॉजिट 5 लाख करोड़ रुपए और बढ़ सकता है। इससे बैंकों को स्टेबल और सस्ते फंडिंग का फायदा मिलेगा। अतिरिक्त लिक्विडिटी से सरकारी बॉन्ड यील्ड में कमी आ सकती है।
FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से किन बैंकों ज्यादा फायदा?
इससे प्राइवेट और सरकारी बैंकों के हिस्से में 42%-42% डिपॉजिट आया है। वहीं, विदेशी बैंकों के हिस्से में 15% डिपॉजिट आया है। इस स्कीम के जरिए HSBC ने 6.1 अरब डॉलर जुटाए हैं। HSBC के बाद SBI और ICICI बैंक ने काफी डिपॉजिट जुटाए है। HDFC बैंक इस रेस में पीछे रहा है।
एक प्राइवेट बैंक के ट्रेज़री हेड ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि FCNR-B डिपॉज़िट स्कीम को मिले अच्छे रिस्पॉन्स की वजह से शायद सेंट्रल बैंक को अपना फैसला बदलना पड़ा।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्कीम में जरूरत से ज्यादा पैसा आ गया है और ऐसे में अब सेंट्रल बैंक की तरफ इसको समय से पहले बंद करने का फैसला लिया गया है।
करूर वैश्य बैंक के ट्रेज़री हेड रामचंद्र रेड्डी ने कहा "स्कीम को समय से पहले बंद करना नीति में बदलाव के बजाय एक तरह का तालमेल बिठाने जैसा लग रहा है। FCNR-B फेसिलिटी को मिली जबरदस्त रिस्पॉन्स से पता चलता है कि इसके जरिए फंड जुटाने का मकसद काफी हद तक पूरा हो गया है और RBI अब इससे मिली लिक्विडिटी और फॉरेन एक्सचेंज पर पड़ने वाले इसके असर को मैनेज करने पर फोकस कर सकता है। मैं इसे नीति में किसी बदलाव के बजाय इस स्कीम में सोच-समझकर किए गए मामूली सुधार के तौर पर देखता हूं।”
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