फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट घटाने का इंडिया पर पड़ेगा कितना असर? जानिए मनीकंट्रोल के पोल में एक्सपर्ट्स ने क्या कहा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व बैंक का इंटरेस्ट रेट घटाने का फैसला अनुमान के मुताबिक है। इसलिए इंडिया सहित दूसरे बाजारों के आउटलुक पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना था कि अब नजरें आरबीआई पर होंगी

अपडेटेड Sep 20, 2024 पर 12:03 PM
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आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक अक्टूबर में होने वाली है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का इंटरेस्ट रेट 50 बेसिस प्वाइंट्स घटाने का इंडिया पर कितना असर पड़ेगा? इस सवाल का जवाब जानने के लिए मनीकंट्रोल ने एक दर्जन से ज्यादा मार्केट एक्सपर्ट्स से बातचीत की। सबका यह मानना था कि फेड का रेट घटाने का फैसला उम्मीद के मुताबिक है। यह ग्लोबल मार्केट्स के लिए पॉजिटिव है, लेकिन इंडिया सहित दूसरे बाजारों पर इसका ज्यादा असर नही पड़ेगा। उनका कहना था कि अब नजरें आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर होंगी। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक अक्टूबर में होने वाली है।

बाजार की नजरें अब आरबीआई के फैसले पर होंगी

मनीकंट्रोल ने इस बारे में एक पोल के जरिए 18 इकोनॉमिस्ट्स की राय पूछी। सिर्फ 3 इकोनॉमिस्ट्स ने अगले महीने RBI के इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की उम्मीद जताई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के हेड (रिटेल रिसर्च) दीपक जसानी ने कहा, "अब फोकस RBI के फैसले पर है। ऐसा लगता है कि आरबीआई तुरंत रेट घटाने की जगह थोड़ी देर करेगा।" उन्होंने कहा कि हालांकि मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर आरबीआई के रुख में बदलाव दिख सकता है।


दिसंबर तक रेट घटा सकता है आरबीआई

एमके ग्लोबल ने कहा कि फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट घटाने के फैसले के बाद आरबीआई भी रेट में कमी करेगा। वह अक्टूबर या दिसंबर में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में इंटरेस्ट रेट में कमी करने का ऐलान कर सकता है। उसने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि इंटरेस्ट रेट में कमी का मार्केट पर ज्यादा असर नहीं दिखेगा। हालांकि कुछ सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है।

विदेशी निवेशक इंडियन मार्केट में कर रहे खरीदारी

श्रीराम एएमसी के सीनियर फंड मैनेजर दीपक रामराजू ने कहा कि स्टॉक मार्केट के सीमित दायरे में बने रहने की उम्मीद है। हालांकि, मार्केट का सेंटिमेंट पॉजिटिव रहेगा। इसकी वजह यह है कि उभरते बाजारों में भी केंद्रीय बैंकों के इंटरेस्ट रेट में कमी का फैसला लेने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि जहां तक इंडिया की बात है तो आरबीआई की नजरें डेटा पर रहेंगी। वह दिसंबर में इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है। इस बीच, फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) पिछले कुछ समय से इंडियन मार्केट में खरीदारी कर रहे हैं। सितंबर में उन्होंने करीब 4 अरब डॉलर की खरीदारी की है।

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निवेश पर इन बातों का भी पड़ेगा असर

एडलवाइज एसेट मैनेजमेंट के सीआईओ त्रिदीप भट्टाचार्य ने कहा, "जहां तक विदेशी निवेश का सवाल है तो इस बारे में चर्चा है कि इससे इंडिया को फायदा हो सकता है। लेकिन, इसकी गारंटी नहीं है। फेडरल रिजर्व का फैसला कैपिटल फ्लो के लिए पॉजिटिव है, लेकिन निवेश पर दूसरी चीजों का भी असर पड़ेगा। इनमें अमेरिका में चुनाव, अर्निंग्स, ऑयल की कीमतें शामिल हैं।" उन्होंने कहा कि आम तौर पर इंटरेस्ट रेट घटने पर उभरते बाजारों में निवेश बढ़ता है। इंडियन मार्केट्स में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज, रियल एस्टेट और आईटी सर्विसेज कंपनियों के शेयरों पर पॉजिटिव असर दिख सकता है।

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