इंडिया सहित दुनियाभर के मार्केट्स की निगाहें 18 दिसंबर पर लगी हैं। 18 दिसंबर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह नया साल शुरू होने से पहले सबसे बड़ा इवेंट होगा। अनुमान है कि इनफ्लेशन हाल में बढ़ने के बावजूद फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में कमी का सिलसिला जारी रखेगा। वह इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी एक-चौथाई फीसदी की कमी कर सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार निगाहें इंटरेस्ट रेट में कटौती से ज्यादा मॉनेटी पॉलिसी में नरमी के ऐलान पर लगी हैं।
रेट का इक्विटी मार्केट्स पर पॉजिटिव असर
CME FedWatch Tool के मुताबिक, 16 दिसंबर को 97.1 फीसदी इनवेस्टर्स का मानना है कि Federal Reserve इस हफ्ते इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी करेगा। एक दिन पहले 96 फीसदी इनवेस्टर्स ने 18 दिसंबर को 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी का अनुमान जताया था। करीब 3 फीसदी से कम इनवेस्टर्स ने इंटरेस्ट रेट में कोई कमी नहीं होने का अनुमान जताया है। Fident Asset Management के फाउंडर और सीआईओ ऐश्वर्य दधीच ने कहा कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में एक-चौथाई फीसदी की कमी कर सकता है। उनका मानना है कि इसका इक्विटी मार्केट्स पर अच्छा असर पड़ेगा।
यूएस इकोनॉमी की सेहत के बारे में भी बताएगा
दधीच का मानना है कि अगर फेडरल रिजर्व ने 18 दिसंबर को इंटरेस्ट रेट घटाने का ऐलान नहीं किया तो अमेरिकी स्टॉक मार्केट्स में मुनाफावसूली दिख सकती है। इसका काफी असर इंडियन स्टॉक मार्केट्स पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा, "इसे छोड़ दें तो हमें मार्केट के लिए दूसरी कोई बड़ी चिंता नहीं दिख रही। खासकर इस महीने तो मार्केट पर असर डालने वाला दूसरा कोई इवेंट नहीं है।" अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट को लेकर अपने फैसले के ऐलान के साथ ही इकोनॉमी की सेहत के बारे में भी अनुमान व्यक्त करेगा। वह यह भी बताएगा कि अगले साल इंटरेस्ट रेट में वह कई बार कमी कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले यह आखिरी पॉलिसी
फेडरल रिजर्व की दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी अमेरिका में नए राष्ट्रपति के शपथ लेने से पहले की अंतिम पॉलिसी होगी। डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिका के राष्ट्रपति बन जाएंगे। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान मॉनेटरी पॉलिसी में नरमी का वादा किया था। इसका मतलब है कि अगर फेडरल रिजर्व अपनी पहली की पॉलिसी में बदलाव करता है तो अमेरिकी सरकार की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। इस साल सितंबर में फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने इंटरेस्ट रेट में 2025 में चार बार एक-चौथाई फीसदी की कमी का अनुमान जताया था।
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RBI पर पड़ेगा फेड के फैसले का असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट घटाने के फैसले का असर इंडिया में RBI पर पड़ेगा। आरबीआई ने दिसंबर की शुरुआत में लगातार 11वीं बार इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं किया। रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बना हुआ है। अब माना जा रहा है कि RBI फरवरी की अपनी अगली मॉनेटरी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है। आरबीआई यह चुका है कि उसकी नजरें रिटेल इनफ्लेशन पर बनी हुई है। वह इंटरेस्ट रेट घटाने से पहले रिटेल इनफ्लेशन का ध्यान रखेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर दिसंबर और जनवरी में रिटेल इनफ्लेशन में कमी आती है तो RBI फरवरी में इंटरेस्ट रेट कम से कम 25 बेसिस प्वाइंट्स घटा सकता है।