FII Outflows: भारतीय शेयर बाजार में अप्रैल की शुरुआत रिकवरी के साथ हुई है, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भरोसा अब भी डगमगाया हुआ है। अप्रैल के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर से ₹19,150 करोड़ की भारी बिकवाली की है। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों के दम पर बाजार ने शानदार वापसी की है।
फाइनेंशियल सेक्टर पर सबसे बड़ी मार
विदेशी निवेशकों (FIIs) ने मार्च में लगभग ₹60,000 करोड़ की बिकवाली की थी, और यह सिलसिला अप्रैल में भी जारी रहा। केवल अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही फाइनेंशियल सर्विसेज से ₹19,150 करोड़ निकाल लिए गए। हैरानी की बात ये है कि भारी बिकवाली के बावजूद Nifty Bank और Nifty Financial Services इंडेक्स में 12% से 12.5% तक की तेजी देखी गई। जानकारों का मानना है कि बड़े प्राइवेट बैंकों के वैल्यूएशन सस्ते होने के कारण निवेशकों ने जमकर खरीदारी की है।
FMCG, टेलीकॉम और ऑटो में भी हुई सेलिंग
सिर्फ बैंकिंग ही नहीं, विदेशी निवेशकों ने लगभग हर बड़े सेक्टर से अपना हाथ खींचा है। FMCG और टेलीकॉम सेक्टर्स से ₹2,976 करोड़ और ₹2,492 करोड़ निकाले गए।ऑटो सेक्टर में ₹3,704 करोड़ और ऑयल & गैस में ₹3,352 करोड़ की बिकवाली दर्ज की गई। आईटी सेक्टर से ₹1,325 करोड़ और मेटल सेक्टर से ₹601 करोड़ की निकासी हुई।
स्मालकैप और मिडकैप में धूम
भले ही विदेशी निवेशक पैसे निकाल रहे हों, लेकिन भारतीय बाजार के 'ब्रॉडर मार्केट' ने सबको चौंका दिया है। Sensex और Nifty दोनों बेंचमार्क इंडेक्स में 8.5% की बढ़त रही। BSE SmallCap 250 में 13% और MidCap 150 में 11% का उछाल आया। यह दिखाता है कि घरेलू निवेशक (DIIs) और रिटेल इन्वेस्टर बाजार को मजबूती दे रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में 'शांति' की उम्मीद से हुई रिकवरी
वैसे FII की बिकवाली के बावजूद मार्केट में तेजी देखने को मिली है। बाजार में इस अचानक आई तेजी के पीछे वैश्विक कारण हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में कमी आने की खबरों ने बाजार के सेंटिमेंट को सुधारा है।वहीं मार्च की भारी गिरावट के बाद कई बड़े और मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक कीमतों पर मिल रहे थे, जिससे घरेलू खरीदारों को मौका मिला।
सेक्टर-वार बिकवाली का डेटा (15 अप्रैल तक)
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