FIIs buying in India: लगातार कई महीनों की ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) इस महीने फरवरी में आखिरकार बिकवाली से अधिक खरीदारी की यानी कि वे नेट बायर्स बन गए। घरेलू मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद 17 महीनों में विदेशी निवेशकों ने सबसे अधिक मासिक निवेश किया। विदेशी निवेशकों ने इस महीने फरवरी में सेकंडरी मार्केट में अब तक करीब $214 करोड़ और प्राइमरी मार्केट में $29.9 करोड़ की नेट खरीदारी की यानी कि कुल मिलाकर उनका नेट इनफ्लो $244 करोड़ रहा। यह सितंबर 2024 के बाद से सबसे अधिक रहा, जब उनका निवेशक करीब $595 करोड़ पर पहुंचा था।
विदेशी निवेशकों ने यह खरीदारी ऐसे समय में की है जब NSDL के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के पहले दो हफ्ते में AI से जुड़ी चिंताओं के चलते FIIs ने आईटी शेयरों में $121 करोड़ से अधिक की बिकवाली की। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी लगभग फ्लैट रहे तो BSE मिडकैप150 इंडेक्स में 2% और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में करीब 1.4% की तेजी आई।
जुलाई 2025 के बाद से पहली बार नेट बायर्स
प्राइमरी मार्केट यानी कि आईपीओ बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी अक्टूबर 2023 से लगातार बनी हुई है। वहीं सेकंडरी मार्केट में बात करें तो जुलाई 2025 के बाद से पहली बार विदेशी निवेशकों ने बिकवाली से अधिक खरीदारी की। अक्टूबर 2025 में थोड़े समय के लिए FIIs कुछ समय तक मामूली नेट बायर्स बने थे, लेकिन अगले छह महीनों तक अधिकतर नेट सेलर्स ही रहे। जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच सेकंडरी मार्केट से उनकी कुल निकासी करीब $2000 करोड़ रही, जबकि प्राइमरी मार्केट में $641 करोड़ का निवेश आया।
क्या अब भा रहा विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार?
अब सवाल उठता है कि इस महीने विदेशी निवेशक जो ताबड़तोड़ खरीदारी कर रहे हैं, क्या वह स्थायी है? इसे लेकर एक्सपर्ट्स का रुझान मिला-जुला है। असित सी मेहता इन्वेस्टमेंट इंटरमीडिएट्स के रिसर्च हेड सिद्धार्थ भामरे का कहना है कि मौजूदा खरीदारी हालिया बिकवाली की तुलना में हल्की है और यह स्ट्रक्चरल बदलाव की बजाय सिर्फ एक पॉज यानी विराम को दिखाता है।
उनका कहना है कि पिछले साल 2025 में भारतीय बाजार वैश्विक स्तर पर सबसे खराब मार्केट में एक रहा और रुपया भी काफी कमजोर हुआ जिसके चलते भारतीय स्टॉक्स काफी सस्ते दिख रहे हैं। इस वजह से सिद्धार्थ का कहना है कि ताबड़तोड़ बिकवाली का माहौल कमजोर हुआ लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि आईटी सेक्टर में बिकवाली जारी रह सकती है तो वित्तीय सेक्टर में एनपीए में तेज उछाल के चलते फिर से निकासी बढ़ सकती है।
स्वतंत्र रिसर्च एनालिस्ट अजय बोडके का कहना है कि विदेशी निवेशकों के लौटने से शुरुआती संकेत यही मिल रहे हैं कि चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और ताइवान की तुलना में लगभग दो साल के कमजोर परफॉरमेंस के बाद फिर से भारतीय मार्केट का रीएसेसमेंट हो रहा है। जब चीन का वैल्यूएशन 7–8x PE तक गिर गया, तो FIIs ने भारत से पैसे निकालकर चीन की ओर रुख किया। एआई रैली तेज होने पर ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे मार्केट में निवेश बढ़ा, जबकि भारत में अर्निंग्स ग्रोथ की सुस्त रफ्तार और हाई वैल्यूएशन के चलते निकासी बढ़ी। जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 यानी दो साल में विदेशी निवेशकों ने करीब $4610 करोड़ के शेयर बेच डाले जिससे भारत को लेकर उनकी स्थिति अंडरवेट हो गई।
अजय का मानना है कि 18-24 महीने में उभरते देशों में भारत सबसे अच्छा परफॉर्म कर सकता है और विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ सकता है। उनका यह भी कहना कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के साथ-साथ यूनाइटेड किंगडम तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते के चलते कारोबारी अनिश्चितताएं कम हुई है। कनाडा के साथ भी बातचीत फिर से शुरू हो गई है।
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