वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने केवायसी यानी नो योर कस्टमर के बारे में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि देश के लोगों के फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़े एक्सपीरियंस में इम्प्रूवमेंट होना चाहिए। साथ ही केवायसी की प्रक्रिया आसान और सुरक्षित होनी चाहिए। वित्तमंत्री ने ये बातें सेबी के 38वें स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
सेबी कॉमन केवायसी नियम बनाने में मदद कर सकता है
वित्तमंत्री ने कहा, "मैं यह कहना चाहती हूं कि सेबी को इंडियन सिक्योरिटीज मार्केट में केवायसी प्रोसेस को आसान बनाने और डिजिटाइजेशन के लिए कॉमन केवायसी नियम बनाने में मदद करनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि चूंकि सेबी के पास व्यापक स्तर का इनवेस्टर पार्टिसिपेशन है, स्ट्रॉन्ग डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है और दूसरे रेगुलेटर्स के बीच उसकी संस्थागत विश्वसनीयता है, जिससे उसे इस मामले में आगे आना चाहिए।
संस्थाएं खुद को बदलने से मजबूती होती हैं
सेबी की स्थापना के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इंडियन मार्केट्स की हिस्ट्री ने कुछ जरूरी सबक सिखाए हैं। उन्होंने कहा, "चुनौतियों के बाद बेहतर संस्थान सामने आते हैं। इसी तरह से मैच्योर फाइनेंशियल सिस्टम तैयार होता है। सीखने और खुद को बदलने से वे और मजबूत होते हैं। इस मामले में सेबी के अलावा कुछ ही ऐसे संस्थान हैं। "
सेबी का सक्सेस रेट्स बहुत स्ट्रॉन्ग
वित्तमंत्री ने सेबी के सक्सेस रेट्स के बारे में बताया। यह सुप्रीम कोर्ट में 90 फीसदी से ज्यादा, सिक्योरिटीज एपेलेट ट्राइब्यूनल में 73 फीसदी और सिविल कोर्ट्स में 92 फीसदी रहा है। इससे सेबी की संस्थागत और लीगल आर्किटेक्चर की मजबूती का पता चलता है। उन्होंने कहा कि FY2025-26 में आईपीओ से जुड़ी गतिविधियां काफी ज्यादा थीं। 366 आईपीओ के जरिए कंपनियों ने करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई। उन्होंने कहा कि इसमें रेगुलेटरी सपोर्ट, देश में बढ़ते रिटेल पार्टिसिपेशन का हाथ रहा। यह देश के फाइनेंशियल हिस्ट्री में बड़ा लोकतांत्रिक बदलाव है।
सेबी को दूसरे देशों के रेगुलेटर्स से चर्चा करनी चाहिए
निर्मला सीतारमण ने कहा, "हमारी रेगुलेटरी बातचीत सिर्फ डोमेस्टिक नहीं रहनी चाहिए। मेरा मानना है कि सेबी को दूसरे देशों के रेगुलेटर्स के साथ समय-समय पर ज्यादा बातचीत करनी चाहिए और क्रॉस-बॉर्डर फ्रॉड जैसे मसलों पर विचार करना चाहिए। साथ ही मार्केट्स में एआई के इस्तेमाल, सस्टेनेबल फाइनेंशियल डिसक्लोजर और सेटलमेंट इंटरऑपरेबिलिटी के बारे में सोचना चाहिए।"