भारतीय आईटी सेक्टर इस समय दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ खराब नतीजों और कमजोर गाइडेंस ने निवेशकों को डरा दिया है, तो दूसरी तरफ रुपये की ऐतिहासिक गिरावट और आकर्षक वैल्यूएशन नई उम्मीद जगा रहे हैं। CNBC-आवाज़ पर लक्ष्मण रॉय के साथ चर्चा में मार्केट एक्सपर्ट्स सुनील सुब्रमण्यम और अनुराग सिंह ने आईटी सेक्टर के भविष्य और निवेश रणनीति पर विस्तार से बात की।
1. रुपये में गिरावट: आईटी के लिए 'सुरक्षा कवच'
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये का ₹94 के पार निकलना आईटी कंपनियों के लिए वरदान साबित हो सकता है। रुपये में 3-4% की गिरावट से आईटी कंपनियों की प्रति शेयर आय (EPS) बढ़ेगी। जब रुपया कमजोर होता है, आईटी शेयरों को सपोर्ट मिलता है। हालांकि पिछले दो दिनों में नतीजों के शोर में यह खबर दब गई, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह एक बड़ा 'कुशन' है।
2. लार्ज-कैप बनाम मिड-कैप: कहां है खतरा?
3. 'बैड न्यूज़' में खरीदारी का मौका
अनुराग सिंह का मानना है कि आईटी सेक्टर इंडिया के लिए एक 'डिपेंडेबल' सेक्टर है। इसलिए आईटी सेक्टर की अनदेखी नहीं की जा सकती। जब खबरें खराब हों और कीमतें कम हों तो उसे खरीदारी का सबसे अच्छा समय माना जाता है। विदेशी निवेशक भारतीय आईटी कंपनियों की 'क्वालिटी ऑडिट' और 'डिविडेंड इनकम' पर भरोसा करते हैं। युद्ध और अस्थिरता खत्म होने पर इनमें विदेशी निवेश फिर से लौटेगा।
लॉन्ग टर्म होल्डिंग के साथ-साथ रुपये की चाल को देखते हुए थोड़े समय के लिए भी आईटी में पोजीशन बनाई जा सकती है। हालांकि, फिलहाल आईटी शेयरों पर दबाव दिख रहा है। इस हफ्ते आईटी शेयरों में बड़ी बिकवाली दिखी। इसकी वजह इंफोसिस का कमजोर गाइडेंस है।
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