1 अक्टूबर से लागू होंगे नए STT नियम, जानें F&O ट्रेडिंग पर इसका क्या पड़ेगा असर?

New STT Rules: फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) आगामी 1 अक्टूबर 2024 से बढ़ने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2024 में इसका ऐलान किया था। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ते डेरिवेटिव मार्केट में सट्टाबाजारी को कम करना है। आइए जानते हैं कि इस बदलाव का निवेशकों और ट्रेडर्स पर क्या असर पड़ सकता है

अपडेटेड Sep 23, 2024 पर 12:52 PM
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STT Rules: ऑप्शंस की बिक्री पर अब STT को प्रीमियम के 0.0625% से बढ़कर 0.1% कर दिया जाएगा

New STT Rules: फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) आगामी 1 अक्टूबर 2024 से बढ़ने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2024 में इसका ऐलान किया था। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ते डेरिवेटिव मार्केट में सट्टाबाजारी को कम करना है। आइए जानते हैं कि इस बदलाव का निवेशकों और ट्रेडर्स पर क्या असर पड़ सकता है।

STT क्या है?

सिक्योरिटीज की खरीद और बिक्री पर लगाए जाने वाले टैक्स को सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) कहते हैं। इसमें इक्विटी शेयर और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस भी शामिल हैं। इस टैक्स को प्रत्येक ट्रांजैक्शन के समय स्टॉक एक्सचेंजों की ओर से लिया जाता है और सरकार को भेजा जाता है।

1 अक्टूबर से होने वाले अहम बदलाव


- ऑप्शंस के लिए

ऑप्शंस की बिक्री पर अब STT को प्रीमियम के 0.0625% से बढ़कर 0.1% कर दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि आप 100 रुपये के प्रीमियम वाला कोई ऑप्शंस बेचते हैं, तो एसटीटी अब 0.0625 रुपये के बजाय 0.10 रुपये होगा।

- फ्यूचर्स के लिए

फ्यूचर्स की बिक्री पर एसटीटी अब ट्रेडिंग प्राइस के 0.0125% से बढ़कर 0.02% हो जाएगा। अगर आप 1 लाख रुपये का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट बेचते हैं, तो STT अब 12.50 रुपये की जगह 20 रुपये लगेगा।

ट्रेडर्स और निवेशकों पर असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बहुत ज्यादा संख्या में ट्रेडिंग करते हैं या छोटे मार्जिन पर सट्टा लगा रहे हैं। STT के बढ़ने से अब प्रत्येक लेनदेन अधिक महंगा हो जाएगा, जिससे शायद बार-बार ट्रेडिंग करने वालों के लिए मोटिवेशन कम हो जाएगा। खासतौर से ऑप्शंस सेगमेंट में, जहां पहले से ही काफी अधिक प्रीमियम रहता है।

में वृद्धि से प्रत्येक लेनदेन अधिक महंगा हो जाएगा, जिससे संभवतः बार-बार व्यापार करने के लिए प्रोत्साहन कम हो जाएगा, खासकर विकल्पों में, जो पहले से ही उच्च प्रीमियम रखते हैं।

ये बदलाव F&O में सट्टाबाजारी को कम करने के लिए किया गया है। SEBI की स्टडी से पता चलता है कि F&O सेगमेंट में 89% रिटेल ट्रेडर्स को घाटा होता है। प्रत्येक ट्रेड की लागत बढाने से सरकार को उम्मीद है कि अब लोग डेरिवेटिव मार्केट में अधिक सतर्कता के साथ भाग लेंगे।

वहीं दूसरी ओर बड़े संस्थानों पर उनकी मोटी जेब और लंबी अवधि के ट्रेडिंग स्ट्रैटजरी के कारण इस बढ़ोतरी का बहुत असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि इसके बावजूद उन्हें F&O सेगमेंट में उनकी लागत बढ़ सकती है।

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