फॉरेन इनवेस्टर्स (एफआईआई/एफपीआई) ने 22 दिसंबर को इंडियन मार्केट्स में शुद्ध रूप से बिकवाली की। उन्होंने इंडियन मार्केट्स में 457 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) 4,058 करोड़ रुपये के शेयर खरीदें। एक्सचेंजों के प्रोविजनल डेटा से यह जानकारी मिली है।
डीआईआई ने की 15296 करोड़ की खरीदारी
सोमवार को कारोबार के दौरान DIIs ने 15,296 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि उन्होंने 11,238 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके उलट FIIs ने 10,714 करोड़ रुपये के शेयर खरीदने, लेकिन 11,171 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस साल फॉरेन इनवेस्टर्स इंडियन मार्केट्स में शुद्ध रूप से 2.77 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। इसके मुकाबले DIIs ने 7.61 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध रूप से खरीदारी की है।
रुपये में मजबूती से भी मार्केट को मिल रहा सपोर्ट
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वेल्थ मैनेजमेंट के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि 22 दिसंबर को इंडियन स्टॉक मार्केट्स में लगातार दूसरे दिन तेजी जारी रही। पिछले तीन दिनों से एफआईआई की खरीददारी और रुपये में मजबूती से बाजार के सेंटीमेंट में मजबूती देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार दूसरे दिन मजबूत आई। इसमें आरबीआई के हस्तक्षेप का हाथ है।
स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांकों में भी अच्छी तेजी
शेयर बाजार में स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे निफ्टी मिडकैप100 इंडेक्स 0.8 फीसदी, जबकि स्मॉलकैप 100 1.2 फीसदी बढ़कर बंद हुए। मार्केट में चढ़ने वाले शेयरों की संख्या गिरने वाले शेयरों के मुकाबले ज्यादा रही। निफ्टी के ज्यादातर सूचकांक ग्रीन निशान में बंद हुए। आईटी इंडेक्स में 2.1 फीसदी और मेटल इंडेक्स में 1.4 फीसदी की तेजी आई।
आईटी इंडेक्स में लगातार चौथे सत्र तेजी
खेमका ने कहा कि अमेरिका में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट घटाने और इंफोसिस के एडीआर में तेज उछाल ने का असर निफ्टी आईटी इंडेक्स पर दिखा। लगातार चौथे दिन निफ्टी आईटी इंडेक्स चढ़कर बंद हुआ। रेलवे और डिफेंस शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसकी वजह यूनियन बजट में रेलवे और डिफेंस के लिए ऐलोकेशन बढ़ने की उम्मीद है।
ज्यादातर शेयरों की कीमतें ऑल-टाइम हाई से नीचे
2025 के अंत में मार्केट के प्रमुख सूचकांक अपने ऑल-टाइम हाई के करीब हैं। लेकिन ज्यादातर शेयरों की कीमतें अपने पीक से दूर हैं। इस वजह से मार्केट में अच्छी रिकवरी के बावजूद ज्यादातर निवेशकों के पोर्टफोलियो में कमजोरी बनी हुई है। निफ्टी 500 के 73 फीसदी शेयर अपने 52 हफ्ते के पीक से 10 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स की हालत इससे भी खराब है।
नए हाई के लिए मार्केट को बड़े ट्रिगर का इंतजार
मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि पिछले 1-2 महीनों से मार्केट में कंसॉलिडेशन दिख रहा है। रिकवरी के बावजूद बाजार के प्रमुख सूचकांक अपने ऑल-टाइम के करीब पहुंचकर ठहर जा रहे हैं। उनके पिछले ऑल-टाइम हाई को पार करने के लिए एक वजह चाहिए। 1 फरवरी को पेश होने वाला यूनियन बजट वह ट्रिगर साबित हो सकता है। अगर सरकार पूंजीगत खर्च का टारगेट बढ़ाने और फिस्कल डिफिसिट का टारगेट घटाने पर फोकस करती है तो इसका मार्केट पर पॉजिटिव असर पड़ेगा।