इंडिया में फॉरेन इनवेस्टर्स (Foreign Investors) की बिकवाली मई में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। मई में उन्होंने 45,276 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह मार्च 2020 के बाद एक महीने में विदेशी निवेशकों की इंडियन मार्केट में सबसे बड़ी बिकवाली है। मार्च 2020 में फॉरेन इनवेस्टर्स ने इंडियन मार्केट में 62,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) की वेबसाइट से यह जानकारी मिली है।
फॉरेन इनवेस्टर्स की इंडिया में लगातार बिकवाली का मई आठवां महीना है। फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली का इतना लंबा सिलसिला कम ही देखने को मिलता है। यह बिकवाली मार्च 2020 में हुई बिकवाली से अलग है। तब कोरोना की महामारी के चलते फॉरेन इनवेस्टर्स ने इंडियन मार्केट में बिकवाली की थी।
विदेशी निवेशकों की जबर्दस्त बिकवाली से मई में सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 3 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। इस वजह से 2012 मई के बाद से यह मई स्टॉक मार्केट के लिए सबसे खराब रहा है। फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली की कुछ हद तक वजह अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में वृद्धि है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व तेजी से बढ़ते इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा है। यूक्रेन क्राइसिस और चीन में लॉकडाउन की वजह का असर भी फॉरेन इनवेस्टर्स पर पड़ा है।
International Monetary Fund (IMF) ने अप्रैल में ग्लोबल इकोनॉमी के ग्रोथ रेट के अनुमान को घटाकर 3.6 फीसदी कर दिया। पहले उसने 4.4 फीसदी ग्रोथ रेट का अनुमान जताया था। 2021 में ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ 6.1 फीसदी थी। यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ग्लोबल इकोनॉमी की सबसे ज्यादा ग्रोथ थी।
विदेशी निवेशकों की इंडियन मार्केट में बिकवाली का सबसे ज्यादा असर आईटी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है। 15 मई तक फॉरेन इनवेस्टर्स ने आईटी शेयरों में 18,500 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। ब्रोकरेज फर्म फिलिप्स कैपिटल का कहना है कि अगले कुछ महीनों में फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली में कमी आएगी। इसकी वजह यह है कि ग्लोबल इकोनॉमी और अमेरिकी इकोनॉमी की सुस्त पड़ती रफ्तार को देखते हुए फेडरल रिजर्व अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में थोड़ी नरमी ला सकता है।