Stock Filters: 4 कसौटी पर परखें स्टॉक, मोतीलाल ओसवाल के रामदेव अग्रवाल की तरह मजबूत करें पोर्टफोलियो

Stock Filters: आमतौर पर निवेशक तब किसी शेयर को अपने पोर्टफोलियो में जगह देते हैं तो वह कई फैक्टर्स पर गौर करते हैं तो कुछ बुलिश माहौल में ताबड़तोड़ खरीदारी करते हैं। मोतीलाल ओसवाल के रामदेव अग्रवाल ने अपना तरीका बताया है। वह चार अहम फैक्टर्स का जिक्र करते हैं कि वह स्टॉक कैसे चुनते हैं और भाव क्या सही है, यह भी देखते हैं। इन तरीकों से आप भी बेहतर स्टॉक चुन सकते हैं

अपडेटेड Dec 12, 2025 पर 2:10 PM
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ब्रोकिंग फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल का कहना है कि उन्हें किसी भी स्टॉक के शुरुआती चरण में निवेश करना पसंद है।

Stock Filters: मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल (Raamdeo Agrawal) ने भारतीय शेयर बाजार में अपने बड़े और सफल दांवों की वजह से दशकों में एक अलग पहचान बनाई है। हाल ही में सीएनबीसी-टीवी18 के साथ इंटरव्यू में दिग्गज निवेशक रामदेव अग्रवाल ने अपनी निवेश शैली के अहम राज बताए। उन्होंने बताया कि किसी भी स्टॉक को अपने पोर्टफोलियो में जगह देने के लिए वह किन चार खास फिल्टर का इस्तेमाल करते हैं। यहां रामदेव अग्रवाल की निवेश शैली के बारे में बताया जा रहा है, जिसे समझकर आप भी अपने पोर्टफोलियो को मजबूत कर सकते हैं।

ग्रोथ के शुरुआती चरण में ही निवेश से मिलेगा बंपर फायदा

ब्रोकिंग फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल का कहना है कि उन्हें किसी भी स्टॉक के शुरुआती चरण में निवेश करना पसंद है। उन्होंने एक किस्सा भी बताया। उन्होंने कहा कि बालकृष्ण इंडस्ट्रीज एक मशहूर और बड़ी कंपनी है लेकिन जब उन्होंने इसके शेयर खरीदे थे तो यह ₹100 करोड़ की कंपनी थी और यह 1 P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) पर थी। उन्होंने कहा कि इसका RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) 40-30% था लेकिन कोई लेने वाला नहीं था। रामदेव ने कहा कि वह कंपनी गए, उन्होंने रसगुल्ला खिलाया और पूरी कहानी बताई। फिर इसके बाद रामदेव ने इसके शेयर खरीदे और महज दो साल में इसके शेयर ₹100 से ₹1200 पर पहुंच गए और उन्होंने पूरा स्टॉक बेच दिया। इस प्रकार रामदेव अग्रवाल ने तगड़ा मुनाफा बनाया।


P/E यानी प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो, किसी भी स्टॉक की मौजूदा कीमत को उसकी प्रति शेयर कमाई से भाग देकर (डिवाइड) करके निकाला जाता है। कुछ लोग पिछले 12 महीनों की कमाई देखते हैं, जबकि कुछ 1–2 साल आगे की अनुमानित EPS को आधार बनाते हैं। P/E यह दिखाता है कि आने वाले समय में ₹1 की कमाई के लिए बाजार कितनी कीमत चुकाने को तैयार है। यह जितना ज्यादा होगा, शेयर उतना महंगा।

सिर्फ ग्रोथ नहीं, भाव भी देखना चाहिए

रामदेव अग्रवाल का कहना है कि कंपनी की ग्रोथ अच्छी दिख रही है तो भी जरूरी नहीं कि स्टॉक में तुरंत निवेश ही कर लेना चाहिए। उन्होंने एशियन पेंट्स का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इसकी ग्रोथ उन्हें हमेशा अच्छी लगी लेकिन यह शेयर हमेशा उनकी पसंद की कीमत से अधिक महंगा रहा। उन्होंने कहा कि जब वह इसे 20 P/E पर खरीदना चाहते थे तो यह 25 P/E हो गया और फिर जब वह इसे 23 P/E पर खरीदने को राजी हुए तो उनके दोस्त ने कहा कि थोड़ा और इंतजार कर लेते हैं। हालांकि फिर यह 90 P/E पर चला गया और इसी प्रकार वह एशियन पेंट्स के शेयर खरीद ही नहीं पाए। उनका मानना है कि फोमो (FOMO) यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट न हीं पालना चाहिए यानी कि मौका चूकने के डर से खरीदारी मत करो।

सही कीमत तय कैसे हो?

अब सवाल उठता है कि आखिर किसी शेयर की सही कीमत तय कैसे हो? इसे लेकर रामदेव अग्रवाल का कहना है कि इसके लिए प्राइस और अर्निंग्स टू ग्रोथ (PEG) रेश्यो को देखना चाहिए। अगर यह एक या इससे कम है तो शेयर अपने ग्रोथ की क्षमता से कम में मिल रहा है। उनका कहना है कि P/E केवल कीमत और कमाई को देखता है, जबकि PEG भविष्य की ग्रोथ को भी शामिल करता है, इसलिए यह किसी शेयर के भविष्य के लिए बेहतर संकेत देता है।

RoE में एक और फिल्टर जोड़ने की सलाह

रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) से यह पता चलता है कि कंपनी शेयरहोल्डर्स के पैसे का कितने बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर रही है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज अपने पोर्टफोलियो में उसी स्टॉक को जगह देता है, जिसका RoE कम से कम 25% हो लेकिन रामदेव अग्रवाल के मुताबिक यह पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि वह यह देखते हैं कि क्या कंपनी 30 दिन में अपना पैसा वसूल कर ले रही है? उन्होंने कहा कि अगर किसी 25% के RoE वाली कंपनी अपना पैसा वसूलने में 100-120 दिन लगा रही है तो वह उनकी पसंद में नहीं है।

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