वित्त वर्ष 2024 में निफ्टी की अर्निंग ग्रोथ का बड़ा हिस्सा निवेश और खपत की मांग (investment and consumption demand) से जुड़े सेक्टरों से आएगा। इनमें फाइनेंशियल, ऑटो और मैटेरियल से जुड़े शेयरों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होगी। वित्त वर्ष 2023 के नतीजों पर बात करते हुए ये बातें BNP पारिबा के अभिराम एलेस्वरपु (Abhiram Eleswarapu) ने मनीकंट्रोल से बातचीत में कही हैं। इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि जरूरी कमोडिटीज की कीमतों में गिरावट के साथ ही कंपनियों के मार्जिन में वित्त वर्ष 2023 के निचले स्तरों से सुधार आने की उम्मीद है। इसके बावजूद उनको इस बात को लेकर संदेह है कि मार्जिन में यह विस्तार उम्मीद के मुताबिक रह पाएगा।
पिछले कुछ महीनों में ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी संबंधी दिक्कतों के बाद निवेशक 2023 की दूसरी छमाही में दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं
आईटी और फाइनेंशियल स्टॉक पसंद
उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि बीएनपी पारिबा को आईटी और फाइनेंशियल स्टॉक पसंद आ रहे हैं। हालांकि भारतीय आईटी कंपनियों को विकसित देशों की मंदी के चलते नियर टर्म में दबाव का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन वर्तमान में आईटी शेयर काफी अच्छे वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। मीडियम से लॉन्ग टर्म में इनमें काफी अच्छी कमाई होने की उम्मीद है।
इसके अलावा पीएनबी पारिबा को फाइनेंशियल सर्विस से जुड़े स्टॉक भी अच्छे नजर आ रहे हैं। फाइनेंशियल स्टॉक का वैल्यूएशन काफी अच्छा है। क्रेडिट ग्रोथ की स्थिति काफी मजबूत है। इनकी असेट क्वालिटी करीब एक दशक के सबसे बेहतर स्थिति में है। ऐसे में आगे फाइनेंशियल शेयरों में अच्छी तेजी आने की संभावना है।
उभरते बाजारों में भारत एक बेहतर निवेश विकल्प
भारत में आने वाले विदेशी ससंस्थागत निवेश पर बात करते हुए अभिराम ने कहा कि पिछले कुछ महीनों को छोड़कर FPI भारतीय बाजार में पिछले कुछ सालों के नेट सेलर रहे हैं। इसके चलते भारतीय इक्विटी मार्केट में उनकी होल्डिंग का प्रतिशत कई सालों के निचले स्तरों पर पहुंच गया है। बाजार को लग रहा है कि दुनिया भर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर अब अपने शिखर के करीब पहुंच गया है। कुछ लोगों का तो ये भी मानना है कि इसी साल यूएस फेड अपनी दरों में कटौती की शुरुआत कर सकता है।
पिछले कुछ महीनों में ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी संबंधी दिक्कतों के बाद निवेशक 2023 की दूसरी छमाही में दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो बाजार में हाल में FPI की तरफ से होने वाले निवेश में तेजी जारी रहेगी। इसके अलावा भारत के मैक्रो स्थितियों में काफी सुधार हुआ है। कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में गिरावट हुई है। ऐसे में उभरते बाजारों में भारत एक बेहतर निवेश विकल्प बनकर उभरा है।
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