एनविजन कैपिटल (Envision Capital) के एमडी और सीईओ नीलेश शाह (Nilesh Shah) ने 1 जून को कहा कि अक्टूबर के महीने में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से नीतिगत दरों में कटौती की उम्मीद की जा सकती। यह कटौती का सबसे अच्छा समय होगा। क्योंकि इस समय की जाने वाली कटौती इस वित्तीय वर्ष के लिए एक बड़ा बूस्टर डोज साबित हो सकता है। मनीकंट्रोल को दिए एक विशेष साक्षात्कार में शाह ने यह भी कहा कि आरबीआई के फैसले की यूएस फेडरल रिजर्व के दरों पर लिए गए फैसले से भी तुलना की जाएगी। बाजार गुरु ने चेतावनी ऐसे में यूएस फेड ब्याज दरों पर क्या फैसला करता है, इस पर नजर रखने की जरूरत है। अगर यूएस फेड अपनी दरों में तेज बढ़त नहीं करता है तो हमारे लिए अच्छा रहेगा।
नीलेश शाह का ये बयान 6-8 जून, 2023 के बीच होने वाली आरबीआई एमपीसी की बैठक के पहले आया है। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि हाल में आए अच्छे मैक्रो आंकड़ो को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ब्याज दरों में बढ़त पर लागू विराम को कायम रख सकता है। गौरतलब है कि खुदरा महंगाई में गिरावट के साथ ही वित्तीय वर्ष 2022-2023 का जीडीपी आंकड़ा उम्मीद से बेहतर रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-2023 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.2 फीसदी पर रहा है। इसके अलावा अप्रैल में रिज़र्व बैंक ने सबको अचंभित करते हुए ब्याज दरों का पॉज़ बटन दबा दिया था और अपनी नीति दर को 6.5 फीसदी पर रखने का निर्णय लिया।
यूएस फेड की पॉलिसी मीट 13-14 जून को
इस बातचीत में नीलेश शाह ने आगे कहा कि अगर यूएस फेड आने वाले महीनों में दरों में तेज बढ़त नहीं करता तो भारत तो ये भारत के लिए अच्छा रहेगा। उन्होंने कहा कि बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि यूएस फेड क्या करता है। इस बीच न्यूज एजेंसी रायटर्स ने सूचित किया है कि फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने जून में होने वाली बैठक में ब्याज दरों में बढ़त पर विराम लगने के संकेत दिए हैं। गौरतलब है कि यूएस फेड की पॉलिसी मीट 13 -14 जून के बीच होगी। हालांकि नीलेश शाह का ये भी मानना हि कि आगे यूएस फेड का फैसला और मानसून बाजार के लिए कोई बड़ी चुनौती साबित नहीं होंगे।
भारत गोल्डी लॉक्स सिचुएशन में
बाजार की हालिया तेजी और अच्छे मैक्रो आंकड़ों की पृष्ठभूमि में बात करते हुए नीलेश शाह ने कहा कि भारत ग्लोबल स्तर पर तमाम अनुकूल स्थितियों के बीच गोल्डी लॉक सिचुएशन में है। बता दें कि गोल्डी लॉक्स सिचुएशन तब होती है जब किसी देश की आर्थिक स्थिति में अच्छी गति के साथ ग्रोथ होती है। लेकिन ये ग्रोथ इतनी भी तेजी से नहीं होती कि देश में महंगाई बढ़ जाए। ऐसी निवेशकों के लिए अच्छी होती है। क्योंकि इस स्थिति कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करती हैं और शेयरों में तेजी आती है।
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