FPI ने मई में की बड़ी सेलिंग, चुनाव नतीजों को लेकर अनिश्चितता के बीच शेयरों से निकाले ₹25586 करोड़

FPI ने मार्च में शेयरों में 35,098 करोड़ रुपये और फरवरी में 1,539 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। मई महीने में FPI ने डेट या बॉन्ड बाजार में 8,761 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले विदेशी निवेशकों ने मार्च में बॉन्ड बाजार में 13,602 करोड़ रुपये, फरवरी में 22,419 करोड़ रुपये और जनवरी में 19,836 करोड़ रुपये का निवेश किया था

अपडेटेड Jun 02, 2024 पर 12:40 PM
आम चुनाव के नतीजे 4 जून को आने हैं। इससे निकट भविष्य में भारतीय बाजार में FPI फ्लो की दिशा तय होगी।

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों को लेकर अनिश्चितता और चीन के बाजारों के बेहतर प्रदर्शन के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मई में भारतीय शेयरों से 25,586 करोड़ रुपये की भारी निकासी की है। इससे पहले मॉरीशस के साथ भारत की कर संधि में बदलाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में निरंतर वृद्धि की चिंताओं के कारण अप्रैल में FPI ने 8,700 करोड़ रुपये से अधिक की सेलिंग की थी। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, FPI ने मार्च में शेयरों में 35,098 करोड़ रुपये और फरवरी में 1,539 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। वहीं जनवरी में उन्होंने शेयरों से 25,743 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

आम चुनाव के नतीजे 4 जून को आने हैं। इससे निकट भविष्य में भारतीय बाजार में FPI (Foreign Portfolio Investors) फ्लो की दिशा तय होगी। FPI की बिकवाली की एक और वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ना है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, वॉटरफील्ड एडवाइजर्स में डायरेक्टर-लिस्टेड इनवेस्टमेंट्स विपुल भोवर ने कहा, ‘‘अपेक्षाकृत ऊंची वैल्यूएशन और विशेष रूप से वित्तीय और आईटी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों के साथ राजनीतिक अनिश्चिता की वजह से FPI भारतीय शेयरों से निकासी कर रहे हैं। इसके अलावा चीन के बाजारों के प्रति FPI के आकर्षण की वजह से भी भारतीय शेयरों से पैसा निकाला जा रहा है।’’

FPI आगे कर सकते हैं खरीद 


जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट विजयकुमार के मुताबिक, जीडीपी की वृद्धि के मजबूत आंकड़े, महंगाई के प्रबंधन के दायरे में रहने और राजनीतिक स्थिरता की स्थिति में FPI आगे खरीद कर सकते हैं। 31 मई को जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। पूरे वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही है।

इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 2.1 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड डिविडेंड ने सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को आगे बढ़ाने को लेकर वित्तीय गुंजाइश प्रदान की है।

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बॉन्ड बाजार को लेकर FPI का रुख

मई महीने में FPI ने डेट या बॉन्ड बाजार में 8,761 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले विदेशी निवेशकों ने मार्च में बॉन्ड बाजार में 13,602 करोड़ रुपये, फरवरी में 22,419 करोड़ रुपये और जनवरी में 19,836 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके पीछे अहम वजह रही जेपी मॉर्गन इंडेक्स में भारत सरकार के बॉन्ड को शामिल किए जाने की घोषणा। जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी ने पिछले साल सितंबर में घोषणा की थी कि वह जून 2024 से भारत सरकार के बॉन्ड को अपने बेंचमार्क एमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में शामिल करेगी।

इस ऐतिहासिक कदम से इसके बाद के डेढ़ से दो साल में भारत को 20 से 40 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने में मदद करेगी। कुल मिलाकर 2024 में FPI अब तक शेयरों से 23,364 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने बॉन्ड बाजार में 53,669 करोड़ रुपये डाले हैं।

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