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नहीं थम रही FPI की सेलिंग, जनवरी में अब तक बेचे ₹22530 करोड़ के भारतीय शेयर; क्या हैं कारण

FPI's Selling in January: एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक मार्केट रैली के लिए कोई साफ पॉजिटिव ट्रिगर नहीं मिलता, तब तक बिकवाली का यह ट्रेंड जारी रह सकता है। 2025 में FPI ने भारतीय इक्विटी बाजार में 1.66 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग की थी

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jan 18, 2026 पर 1:27 PM
नहीं थम रही FPI की सेलिंग, जनवरी में अब तक बेचे ₹22530 करोड़ के भारतीय शेयर; क्या हैं कारण
बाजार विशेषज्ञों ने इस निकासी के लिए वैश्विक और घरेलू कारकों को जिम्मेदार ठहराया है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जनवरी महीने में अब तक भारतीय शेयरों से 22,530 करोड़ रुपये से अधिक निकाले हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती इसके प्रमुख कारण हैं। साल 2025 में FPI ने भारतीय इक्विटी बाजार में 1.66 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। करेंसी की अस्थिरता, वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी की आशंका, और बाजार के हाई वैल्यूएशन के कारण ऐसा हुआ। 2025 के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये की वैल्यू में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई। इसमें FPI के ओर से लगातार बिकवाली का अहम रोल रहा।

NSDL के आंकड़ों के अनुसार FPI ने 1 से 16 जनवरी के बीच भारतीय इक्विटी से 22,530 करोड़ रुपये निकाले। बाजार विशेषज्ञों ने इस निकासी के लिए वैश्विक और घरेलू कारकों को जिम्मेदार ठहराया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सेंट्रिसिटी वेल्थटेक के इक्विटी हेड और फाउंडिंग पार्टनर सचिन जसुजा ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और मजबूत डॉलर ने विकसित बाजारों में रिस्क एडजस्टेड रिटर्न में सुधार किया है। ऐसे में उभरते बाजारों से पूंजी निकलकर दूसरे बाजारों की ओर जा रही है।

मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर-रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ी हुई यील्ड और डॉलर की मजबूती ने अमेरिकी एसेट्स को तुलनात्मक रूप से अधिक आकर्षक बना दिया है। भू-राजनीतिक और व्यापार संबंधी अनिश्चितताएं उभरते बाजारों के प्रति निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता पर लगातार दबाव डाल रहे हैं।

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