फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) ने एक महीने के नेट इनफ्लो के बाद देश में इक्विटी सेगमेंट से जुलाई में शुरुआती सात ट्रेडिंग सेशन के दौरान 2,249 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसका बड़ा कारण इन इनवेस्टर्स की ओर से प्रॉफिट बुकिंग हो सकता है। मार्केट्स के अपने हाई लेवल से निकट ट्रेड करने से बहुत से इनवेस्टर्स सतर्कता से आगे बढ़ रहे हैं।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वी के विजयकुमार ने कहा कि यह अच्छा है कि विदेशी इनवेस्टर्स बहुत अधिक बिकवाली नहीं कर रहे। उन्होंने बताया, "वैल्यूएशन बढ़े हुए हैं और मार्केट में बड़ी गिरावट आने के कोई संकेत नहीं हैं। अमेरिका में 10 वर्ष के बॉन्ड की यील्ड में लगभग 1.3 प्रतिशत की कमी आने से मार्केट का इक्विटी की ओर रुझान बढ़ा है।"
डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने से इमर्जिंग मार्केट्स की ओर इनवेस्टमेंट फ्लो पर असर पड़ा है।
इसके विपरीत, डेट सेगमेंट में जुलाई में अभी तक 2,088 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा है।
जून में FPI ने देश के इक्विटी और डेट मार्केट्स में लगभग 13,269 करोड़ रुपये का नेट इनवेस्टमेंट किया था। हालांकि, अप्रैल और मई में ये नेट सेलर्स रहे थे।
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कोटक सिक्योरिटीज के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (इक्विटी टेक्निकल रिसर्च), श्रीकांत चौहान ने बताया कि इस सप्ताह MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स 3.9 प्रतिशत गिरा है। इस महीने अभी तक सभी महत्वपूर्ण इमर्जिंग मार्केट्स और एशियन मार्केट्स में FPI की ओर से आउटफ्लो हुआ है।
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