Global Markets: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को लेकर देश को संबोधित किया। उनके संबोधन ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में खलबली मचा दी। ट्रंप के भाषण के बाद ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार से लेकर जापान तक, हर तरफ गिरावट देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच, निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय फिर से हाथ खींचना शुरू कर दिया है।
एशियाई बाजारों में हाहाकार
ट्रंप के भाषण के बाद एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई-225 इंडेक्स 1.5% गिर गया, जबकि दक्षिण कोरिया के Kospi में 2.6% की भारी गिरावट आई। सियोल के बाजार में पहले की तेजी पूरी तरह खत्म हो गई। हांगकांग का हैंग सेंग 1% फिसला, जबकि शंघाई, सिंगापुर, ताइपे और सिडनी के बाजारों में भी बिकवाली का दौर रहा।
दरअसल निवेशकों को उम्मीद थी कि ट्रंप युद्ध खत्म करने का कोई ठोस संकेत देंगे, लेकिन कोई स्पष्ट संकेत न मिलने से निवेशकों ने 'जोखिम से बचने' की राह अपनाई जिससे भारी बिकवाली देखने को मिली।
सोना और चांदी में भी बड़ी गिरावट
आमतौर पर संकट के समय सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार बाजार में अजीब हलचल दिखी। सोने की कीमत $4,700 प्रति औंस से नीचे गिर गई, जबकि चांदी $73 प्रति औंस के स्तर से नीचे आ गई। विशेषज्ञ इसे निवेशकों द्वारा अपनी पोजीशन को नए सिरे से मैनेज करने का असर मान रहे हैं।
ट्रंप का दावा बनाम बाजार की हकीकत
बाजार में यह उथल-पुथल ऐसे समय में हुई जब ट्रंप अपनी अर्थव्यवस्था की तारीफ कर रहे थे। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दुनिया की 'सबसे हॉट इकोनॉमी" बताया और कहा कि वहां कोई महंगाई नहीं है, साथ ही रिकॉर्ड $18 ट्रिलियन का निवेश आ रहा है। हालांकि, ट्रंप के दावों के बावजूद वैश्विक बाजार नीचे गिर रहे थे। अमेरिकी बाजारों के खुलने से पहले ही वहां के 'फ्यूचर्स' गिरने लगे। Nasdaq-100 फ्यूचर्स में लगभग 1.3% की गिरावट आई। Dow Jones और एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी गहरे लाल निशान में चले गए। एन कूल्टर ने बढ़ते तेल की कीमतों का स्क्रीनशॉट साझा कर ट्रंप के भाषण पर तंज कसा।
विशेषज्ञों ने बताया क्या है गिरावट की वजह?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के भाषण ने शांति की उम्मीदों को झटका दिया है। एसपीआई एसेट मैनेजमेंट के स्टीफन इनेस के अनुसार, 'भाषण में लक्ष्यों को पूरा करने की बात तो थी, लेकिन समाधान की नहीं।' उन्होंने कहा कि 'अधूरा काम' बाजार में अस्थिरता के लिए ऑक्सीजन का काम कर रहा है। तेल की कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि बाजार को लगता है कि युद्ध अभी खत्म होने के करीब नहीं है।