जार्ज सोरोस की टिप्पणी और अदाणी पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से भारत में होने वाले निवेश पर नहीं पड़ेगा असर: ट्रू बीकन के रिचर्ड पैटल

रिचर्ड ने कहा कि रुपये की कमजोरी के बावजूद अगर डॉलर में देखें तो भारत ही अकेला एक ऐसा देश है जिसने पिछले साल पॉजिटिव रिटर्न दिया है। दूसरे ग्लोबल बाजारों से तुलना करें तो भारतीय बाजार ने 10-45 फीसदी ज्यादा रिटर्न दिया है। लेकिन अब स्थितियों में कुछ बदलाव आया है। जिसके चलते भारत सहित दुनिया के तमाम देशों पर दबाव बना है। अकेले भारत ही दबाव में नहीं है

अपडेटेड Mar 02, 2023 पर 4:12 PM
Story continues below Advertisement
भारत ने महंगाई से निपटने के लिए तुलनात्मक रूप से काफी बेहतर तरीके से फैसले लिए। लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी पर नजर डालें तो वहां अभी भी महंगाई डबल डिजिट में है

ABHINAV KAUL

बेंगलुरु स्थित ट्रू बीकन (True Beacon) एक वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी है। ये विदेशी निवेशकों के लिए अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड (AIFs) और एक पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) चलाती है, जो निफ्टी 200 प्रोडक्ट है। कंपनी का एक ऑफिस गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी में भी भी है। इसके जरिए ये विदेशी निवेशकों को अपनी सेवाएं देती है।

भारत ने महंगाई को नियंत्रित करने में काफी अच्छी सफलता पाई


ट्रू बीकन के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड पैटल (Richard Pattle) का कहना है कि भारत ने महंगाई को नियंत्रित करने में काफी अच्छी सफलता पाई है। वहीं ग्लोबल लेबल पर महंगाई चिंता का विषय बना हुआ है। PMS बाज़ार के दुबई अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट समिट के आयोजन स्थल पर मनीकंट्रोल को दिए गए एक साक्षात्कार में रिचर्ड पैटल ने PMS इंडस्ट्री से जुड़ी अपेक्षाओं और भारत के इकोनॉमिक आउटलुक को लेकर एक लंबी बातचीत की। यहां हम इसी बातचीत ता संपादित अंश दे रहे हैं।

भारत में लगभग ऐसे 300 स्टॉक हैं जिन पर म्यूचुअल फंड और PMS फोकस करते हैं। ऐसे में म्यूचुअल फंड्स से बेहतर रिटर्न देने के लिए आपकी क्या रणनीति रहेगी?

इस सवाल का जवाब देते हुए रिचर्ड पैटल ने कहा कि हमारा AIFs मुख्य रूप से निफ्टी 50 शेयरों पर फोकस करता है। हमारे पास बेंगलुरु में एक छोटी लेकिन हाईली फोकस्ड टीम है। उनको स्टॉक्स चुनने का बहुत व्यापक अनुभव है। अपनी इस टीम के दम पर हम अल्फा रिटर्न देने वाले शेयरों का चुनाव करने में सक्षम हैं।

महंगाई को लेकर आपना कितना चिंतित हैं?

इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर पर यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है। हम पिछले 18 महीने या उससे ज्यादा समय से महंगाई के खतरे को लेकर लोगों को आगाह कर रहे हैं। दुनिया के सेंट्रल बैंक महंगाई को लेकर देर से एक्शन में आते दिखे। हालांकि भारत ने महंगाई से निपटने के लिए तुलनात्मक रूप से काफी बेहतर तरीके से फैसले लिए। लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी पर नजर डालें तो वहां अभी भी महंगाई डबल डिजिट में है। हालांकि वर्तमान में महंगाई के ठंडे पड़ने के कुछ संकेत मिले हैं। लेकिन इसमें उतनी तेज गिरावट नहीं हुई है जितनी की उम्मीद थी।

पिछले साल भारतीय बाजार ने दुनिया के दूसरे बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन कुछ हफ्तों से भारतीय बाजार दबाव में हैं। ऐसे में आगे भारतीय बाजार का प्रदर्श कैसा रह सकता है?

इसका जवाब देते हुए रिचर्ड ने कहा कि रुपये की कमजोरी के बावजूद अगर डॉलर में देखें तो भारत ही अकेला एक ऐसा देश है जिसने पिछले साल पॉजिटिव रिटर्न दिया है। दूसरे ग्लोबल बाजारों से तुलना करें तो भारतीय बाजार ने 10-45 फीसदी ज्यादा रिटर्न दिया है। लेकिन अब स्थितियों में कुछ बदलाव आया है। जिसके चलते भारत सहित दुनिया के तमाम देशों पर दबाव बना है। अकेले भारत ही दबाव में नहीं है। लोगों में हाल के दिनों में अमेरिका और यूके जैसे बाजारों को लेकर अतिउत्साह भी देखने को मिला है। इसको लेकर मैं बहुत ज्यादा चिंतित नहीं हूं। इसके अलावा हाल के दिनों में डॉलर में आई मजबूती अमेरिकी बाजार के नजरिए से बहुत अच्छी बात नहीं है। इससे डॉलर में मिलने वाले रिटर्न का स्तर घटा है। मेरा मानना है कि वर्तमान स्थिति एक अस्थाई स्थिति है। इस साल की दूसरी छमाही से स्थितियां फिर से सामान्य हो जाएंगी। भारतीय बाजार का आकर्षण एक बार फिर से कायम होता नजर आएगा।

Daily Voice-बैकिंग और एनबीएफसी शेयर नजर आ रहे अच्छे, पावर शेयर भी कराएंगा अच्छी कमाई

क्या जार्ज सोरोस की टिप्पणी और अदाणी पर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को कारण भारत को लेकर निवेशकों के नजरिए में नकारात्मक बदलाव आएगा?

इस सवाल पर रिचर्ड पैटल ने कहा कि दुनिया भर में इस तरह की खबरें आती-जाती रहती हैं। इससे भारत या किसी दूसरे देश के बाजार पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। ऐसे में हमें ध्यान रखना चाहिए कि यह रिपोर्ट किस तरफ से आई है। इसमें उनके कौन से स्वार्थ छिपे हुए हैं। इसके बाद भी हमारा मानना है कि कंपनियों के गर्वनेंस और बाजार के रेगुलेटरी सिस्टम में ऐसी खामिया नहीं होनी चाहिए। जिसका निहितस्वार्थी तत्व अपने पक्ष में इस्तेमाल कर सकें। हमें इस बारे में हो रही जांच के नतीजों का इंतजार करना होगा। ये सिर्फ भारत से जुड़ा कोई अकेला और विशेष मुद्दा नहीं है। पूरी दुनिया में इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं और आगे भी ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।