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नई सीरीज के पहले दिन कैसी होगी बाजार की चाल, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है संकेत

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के संभलकर खुलने की उम्मीद है, क्योंकि GIFT निफ्टी मामूली गिरावट के साथ सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है

Edited By: Sujata Yadavअपडेटेड Sep 30, 2026 पर 8:46 AM
नई सीरीज के पहले दिन कैसी होगी बाजार की चाल, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है संकेत
मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे F&O एक्सपायरी सेशन में भारतीय शेयरों में गिरावट के बाद, सुबह 8 बजे GIFT निफ्टी की अक्टूबर सीरीज 25 अंक या 0.11 फीसदी गिरकर 22,805 पर ट्रेड कर रही थी।

Gift Nifty Indicator: बुधवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के संभलकर खुलने की उम्मीद है, क्योंकि GIFT निफ्टी मामूली गिरावट के साथ सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा है। एशियाई शेयरों में रिकवरी और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताओं में कुछ कमी के बावजूद, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का असर बना हुआ है। निवेशक US के अहम महंगाई आंकड़ों से पहले भी सतर्क रहेंगे, क्योंकि ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं।

मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे F&O एक्सपायरी सेशन में भारतीय शेयरों में गिरावट के बाद, सुबह 8 बजे GIFT निफ्टी की अक्टूबर सीरीज 25 अंक या 0.11 फीसदी गिरकर 22,805 पर ट्रेड कर रही थी। US-ईरान शांति समझौते की संभावनाओं को लेकर अनिश्चितता, FII की लगातार बिकवाली, कमजोर रुपया और तेल की ऊंची कीमतें व बॉन्ड यील्ड ने निवेशकों को सतर्क रखा। सेंसेक्स 242.65 अंक या 0.33 प्रतिशत गिरकर 72,529.07 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 64.05 अंक या 0.28 प्रतिशत गिरकर 22,716.20 पर आ गया।

एशियाई बाजार में ग्लोबल संकेतों में कुछ सुधार हुआ, जहां क्षेत्रीय शेयरों में रिकवरी दिखी और US स्टॉक-इंडेक्स फ्यूचर्स में थोड़ी बढ़त हुई। भारतीय बाजारों के लिए एक और बड़ी चिंता का विषय कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, लेकिन मिडिल ईस्ट से सप्लाई में सुधार के संकेतों के बाद यह हाल के उच्चतम स्तरों से काफी नीचे रहा।

हालांकि, घरेलू हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। पिछले सेशन में FII ने लगभग 10,000 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे, जबकि कमजोर रुपया, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US यील्ड में बढ़ोतरी से जोखिम बना हुआ है। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली का एक बड़ा हिस्सा संभाल लिया और लगभग 7,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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