Global markets: US मार्केट में जोरदार तेजी, क्रूड की कीमतों में उछाल के बावजूद S&P 500 रिकॉर्ड स्तर के करीब

Global markets: तेल की कीमतें 100 डॉलर के करीब बनी रहने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के कारण बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है, इसके बावजूद शेयर बाज़ार ने पश्चिम एशिया युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई कर ली है

अपडेटेड Apr 14, 2026 पर 10:00 AM
Wall Street : अमेरिका में बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। कंपनियों के मज़बूत नतीजे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर वॉल स्ट्रीट में बनी चिंताओं को दूर करने में मदद कर सकती हैं

US Markets: सोमवार को अमेरिकी शेयरों में तेज़ी आई और अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण अब तक हुए सारे नुकसानों की भरपाई हो गई। वॉल स्ट्रीट में अभी भी ये उम्मीद बाकी है कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था सबसे बुरे हालात से बच सकती है। कल S&P 500 में 1% की बढ़त हुई है और यह उसी स्तर पर वापस आ गया है,जहां यह फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमला करने से पहले था। यह इंडेक्स इस साल की शुरुआत में बने अपने अब तक के हाई से सिर्फ़ 1.3% नीचे है। डाओ जोन्स में 301 अंकों,यानी 0.6% की बढ़त हुई। वहीं, नैस्डैक (Nasdaq Composite) 1.2% ऊपर चढ़ा।

क्रूड मार्केट की बात करें तो वीकेंड में युद्धविराम की बातचीत नाकाम रहने के बाद क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। लेकिन सोमवार को दिन बढ़ने के साथ-साथ कीमतों में आई तेज़ी कुछ कम हुई। कुल मिलाकर फाइनेंशियल मार्केट में कल जो हलचल देखने को मिली,वह युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक आए भारी उतार-चढ़ाव की तुलना में काफी कम थी।

बाज़ार इस चिंता और उम्मीद के बीच झूल रहे हैं कि युद्ध लंबे समय तक चलेगा या इसका कोई समाधान निकल आएगा। अगर कच्चे तेल के कारोबार से बाधा खत्म होती है सभी को इससे फायदा होगा।


ईरान की नाकाबंदी से वैश्विक बाज़ार में तेल की आपूर्ति और भी कम हो जाएगी। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं। इसी संकरे जलमार्ग के रास्ते ही फ़ारस खाड़ी क्षेत्र से निकाला जाने वाला अधिकांश तेल दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुंचता है।

ईरान ने फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को उड़ाने की धमकी देकर अमेरिकी नाकेबंदी का जवाब देने की धमकी दी है। इसके बाद,अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट का भाव 4.4 फीसदी बढ़कर 99.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है जो युद्ध से पहले के लगभग 70 डॉलर के स्तर से काफ़ी ज़्यादा है।

लेकिन क्रूड अभी भी 119 USD के उस हाई लेवल से नीचे है,जिसे इसने तब छुआ था,जब US-ईरान युद्ध को लेकर चिंताएं अपने चरम पर थीं। फिलहाल क्रूड 100 USD से नीचे आ गया है।

वेल्स फ़ार्गो इन्वेस्टमेंट इंस्टीट्यूट में ग्लोबल इक्विटीज़ और रियल एसेट्स के प्रमुख समीर समाना का कहना है कि बाज़ारों को इस बात से कुछ राहत मिल रही है कि दोनों पक्ष बातचीत कर रहे हैं और फ़िलहाल संघर्ष-विराम बना हुआ है।

ओवल ऑफिस के बाहर बोलते हुए,ट्रंप ने सोमवार को संकेत दिया कि अमेरिका अभी भी ईरान के साथ बातचीत करने को तैयार है। ट्रंप ने कहा,"मैं आपको बता सकता हूं कि दूसरी तरफ से हमें संपर्क किया गया है।"

पहली तिमाही के नतीजों पर रहेगी बाजार की नजर

इस बीच,अमेरिका में बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। कंपनियों के मज़बूत नतीजे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को लेकर वॉल स्ट्रीट में बनी चिंताओं को दूर करने में मदद कर सकती हैं।

पारंपरिक रूप से हर तिमाही में सबसे पहले बड़े बैंकों के नतीजें आते है। Citigroup, JPMorgan Chase, Wells Fargo और Bank of America इस हफ़्ते के आखिर में अपने नतीजे पेश करेंगे। Johnson & Johnson, Netflix और PepsiCo के नतीजे भी इसी हफ्ते आएंगे। इन पर बाजार की नजरें रहेंगी।

 

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