Gold ETF vs Gold Mutual Fund: पिछले कुछ साल में सोने ने शानदार रिटर्न दिया है। इसमें भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते तेजी आई।

Gold ETF vs Gold Mutual Fund: पिछले कुछ साल में सोने ने शानदार रिटर्न दिया है। इसमें भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते तेजी आई।
अब कई निवेशक उलझन में हैं कि सोने में निवेश का बेहतर तरीका क्या है। Gold ETF और Gold Mutual Fund ऐसे दो लोकप्रिय विकल्प हैं। इनके जरिए बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे सोने में निवेश किया जा सकता है। इससे स्टोरेज, शुद्धता और मेकिंग चार्ज जैसी परेशानियों से भी बचा जा सकता है। हालांकि, दोनों विकल्प एक जैसे नहीं हैं।
Gold ETF और Gold Mutual Fund में अंतर
Gold ETF सीधे सोने या सोने से जुड़े एसेट्स में निवेश करता है। इसकी खरीद-बिक्री शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर होती है। वहीं, Gold Mutual Fund सीधे सोने में पैसा नहीं लगाता। यह Gold ETF में निवेश करता है।
दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर डिमैट अकाउंट का है। Gold ETF खरीदने के लिए डिमैट अकाउंट जरूरी होता है। वहीं, Gold Mutual Fund को दूसरे म्यूचुअल फंड की तरह सीधे निवेश प्लेटफॉर्म या SIP के जरिए खरीदा जा सकता है।
कम खर्च चाहते हैं तो Gold ETF बेहतर
निवेश की लागत लंबे समय में रिटर्न पर असर डालती है। Gold ETF सीधे सोने में निवेश करते हैं, इसलिए उनका एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर कम होता है। वहीं, Gold Mutual Fund को Gold ETF में निवेश करना पड़ता है। इस वजह से उसमें अतिरिक्त खर्च जुड़ जाता है।
हालांकि यह अंतर बहुत बड़ा नहीं होता, लेकिन लंबे समय में कम लागत निवेशकों को फायदा पहुंचा सकती है।
सुविधा के मामले में Gold Mutual Fund आगे
यहीं पर Gold Mutual Fund कई निवेशकों की पहली पसंद बन जाते हैं। इसके लिए डिमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती। बाजार खुलने के समय खरीद-बिक्री करने की भी कोई मजबूरी नहीं रहती। SIP शुरू करना भी काफी आसान होता है।
जो लोग हर महीने 2,000 रुपये, 5,000 रुपये या 10,000 रुपये जैसी रकम निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए Gold Mutual Fund ज्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकता है।
रिटर्न में कितना अंतर होता है?
असल में दोनों विकल्पों के रिटर्न में बहुत बड़ा अंतर नहीं होता। चूंकि दोनों ही सोने की कीमतों से जुड़े हैं, इसलिए लंबी अवधि में इनका प्रदर्शन लगभग एक जैसी दिशा में चलता है।
हालांकि, कम खर्च और सीधे सोने में निवेश की वजह से Gold ETF को हल्की बढ़त मिल सकती है। पांच या दस साल की अवधि में यह छोटा अंतर भी बड़ा असर दिखा सकता है।
टैक्स के मामले में कौन बेहतर?
टैक्सेशन भी दोनों विकल्पों के बीच एक अहम अंतर है। Gold ETF में 12 महीने बाद होने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर 12.5% टैक्स लगता है।
वहीं, Gold Mutual Fund में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का फायदा पाने के लिए कम से कम 24 महीने तक निवेश बनाए रखना जरूरी है। इसके बाद भी टैक्स की दर 12.5% ही रहती है। यानी कम होल्डिंग पीरियड की वजह से Gold ETF को यहां थोड़ा फायदा मिलता है।
आपको आखिर किसे चुनना चाहिए?
इस सवाल का जवाब सोने से ज्यादा आपकी निवेश की आदतों पर निर्भर करता है। अगर आपके पास पहले से डिमैट अकाउंट है, आप उसका इस्तेमाल करने में सहज हैं और कम लागत वाला विकल्प चाहते हैं, तो Gold ETF बेहतर हो सकता है।
वहीं, अगर आप SIP के जरिए निवेश करना पसंद करते हैं, ट्रेडिंग अकाउंट नहीं रखना चाहते और आसान निवेश चाहते हैं, तो Gold Mutual Fund ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।
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