Gold-Silver Price: सोना और चांदी की कीमतों में बुधवार 8 अप्रैल को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर तेज उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों के बीच निवेशकों की खरीदारी बढ़ी, जिससे इनकी कीमतों में मजबूती आई।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोने का भाव 2.24% चढ़कर करीब 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) पर पहुंच गया। चांदी में तो इससे भी अधिक तेजी देखने को मिली। चांदी का भाव 5.24% उछलकर 2.43 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गया।
यह तेजी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बुलियन की कीमतों में जोरदार बढ़त दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को स्पॉट गोल्ड का करीब 2.3% बढ़कर 4,812 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसमें 3% से ज्यादा की तेजी भी देखी गई।
वहीं, चांदी की कीमतों में और अधिक मजबूती रही और यह करीब 5% उछलकर 76 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई।
भू-राजनीतिक तनाव में नरमी का असर
गोल्ड-सिल्वर मार्केट में यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के युद्धविराम का ऐलान होने के बाद आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दो सप्ताह के लिए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोक सकता है, जिससे बातचीत की संभावना बढ़ी है। इस बयान के बाद बाजार में रिस्क से दूर रहने का सेंटीमेंट कुछ कम हुआ और निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को दोबारा रीबैलेंस करना शुरू किया।
“रिलीफ रैली” लेकिन अनिश्चितता बरकरार
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि यह तेजी एक तरह की “राहत भरी रैली” है। निवेशकों ने जियोपॉलिटिकल तनाव में आई कमी को पॉजिटिव माना है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि यह राहत लंबे समय तक टिकेगी या नहीं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
ब्याज दर और महंगाई पर नजर
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि सोने की दिशा आगे भी ब्याज दरों और महंगाई के ट्रेंड से प्रभावित होगी। अगर क्रूड की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर इसका असर पड़ सकता है। सोना आमतौर पर अनिश्चितता और महंगाई के समय अच्छा प्रदर्शन करता है। लेकिन ऊंचे ब्याज दरों के माहौल में इसकी तेजी सीमित हो सकती है, क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है।
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले संकेतों पर है, खासकर पिछली बैठक के मिनट्स पर, जिससे ब्याज दरों के भविष्य को लेकर संकेत मिल सकते हैं। VT मार्केट्स के रॉस मैक्सवेल के मुताबिक, कीमती धातुओं में इस पूरे साल उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को ब्याज दर, डॉलर की मजबूती, महंगाई और भू-राजनीतिक घटनाओं जैसे फैक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए।
घरेलू मांग भी दे रही सपोर्ट
भारत में सोने की मांग सांस्कृतिक और निवेश दोनों नजरिए से मजबूत बनी रहती है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतों में हल्की गिरावट भी ज्वेलरी डिमांड को बढ़ा देती है, जिससे बाजार को अतिरिक्त सपोर्ट मिलता है।
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