Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर ETF फिर 20% तक क्रैश, निवेशकों को तगड़ा झटका, क्या अब बेच दें?
Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETF) में सोमवार 2 फरवरी को भी भारी गिरावट जारी रही। खास तौर से कई सिल्वर ETFs के भाव 18 से 20 प्रतिशत तक टूट गए। सोने और चांदी की कीमतों में और गिरावट आने से इन ETFs में भारी बिकवाली देखने को मिली। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब शेयर बाजार पहले से दबाव में है
Gold-Silver ETFs: मार्च एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 6 प्रतिशत टूटकर 2,49,713 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया
Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETF) में सोमवार 2 फरवरी को भी भारी गिरावट जारी रही। खास तौर से कई सिल्वर ETFs के भाव 18 से 20 प्रतिशत तक टूट गए। सोने और चांदी की कीमतों में और गिरावट आने से इन ETFs में भारी बिकवाली देखने को मिली। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब शेयर बाजार पहले से दबाव में है और इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स VIX उछलकर 15.55 तक पहुंच गया है।
सोना और चांदी की कीमतों में और तेज गिरावट
कीमती धातुओं में गिरावट का सिलसिला सोमवार सुबह भी जारी रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स करीब 3 प्रतिशत गिरकर 1,43,335 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले पिछले गुरुवार को सोने ने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल-टाइम हाई बनाया था, जिसके बाद से इसमें करीब 26 प्रतिशत या लगभग 50,000 रुपये की गिरावट आ चुकी है।
जून और फरवरी एक्सपायरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखी गई और इनमें क्रमशः 4 प्रतिशत और करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
चांदी में गिरावट इससे भी तेज रही। मार्च एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 6 प्रतिशत टूटकर 2,49,713 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। यह स्तर इसके हालिया रिकॉर्ड उच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम से करीब 41 प्रतिशत या लगभग 1,70,335 रुपये नीचे है। मई एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स भी करीब 6 प्रतिशत गिरकर 2,65,502 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।
गोल्ड और सिल्वर ETFs में भारी बिकवाली
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर ETF पर पड़ा। जिन ETF में हाल के महीनों में जबरदस्त तेजी देखी गई थी, उनमें सोमवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। एडलवाइस सिल्वर ETF करीब 20 प्रतिशत टूटकर निचले सर्किट पर 210.61 रुपये पर आ गया। एक्सिस सिल्वर ETF में भी लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
यूटीआई सिल्वर ETF, डीएसपी सिल्वर ETF, आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ETF, कोटक सिल्वर ETF समेत कई अन्य सिल्वर ETF भी करीब 20 प्रतिशत तक टूटे। मिराए एसेट सिल्वर ETF, मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ETF, 360 वन सिल्वर ETF और एचडीएफसी सिल्वर ETF में लगभग 19 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ETF, निप्पॉन इंडिया सिल्वर ETF, एसबीआई सिल्वर ETF और टाटा सिल्वर ETF करीब 18 प्रतिशत तक फिसल गए।
गोल्ड ETF में भी कमजोरी देखने को मिली। आदित्य बिड़ला सन लाइफ गोल्ड ETF और मोतीलाल ओसवाल गोल्ड ETF 9 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ETF, मिराए एसेट गोल्ड ETF में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट रही। एडलवाइस गोल्ड ETF, एचडीएफसी गोल्ड ETF, बड़ौदा बीएनपी पैरिबा गोल्ड ETF और निप्पॉन इंडिया ETF गोल्डबीज़ समेत अन्य गोल्ड ETF में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
Gold-Silver ETFs: गिरावट की बड़ी वजहें क्या हैं?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने-चांदी में आई इस तेज गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। हालिया रिकॉर्ड तेजी के बाद बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली देखने को मिल रही है। इसके साथ ही डॉलर में मजबूती ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को अमेरिका के सेंट्रल बैंक, फेडरल रिजर्व बैंक का अगला चेयरमैन नियुक्त करने का ऐलान किया है। बाजार को आशंका है कि केविन वॉर्श अपनी नियुक्ति के बाद अमेरिका की मॉनिटरी पॉलिसी को और सख्त बना सकते हैं। उन्हें ब्याज दरों में कटौती को लेकर सख्त रुख रखने वाला माना जाता है, जिससे सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव पड़ा।
इसके अलावा, CME ग्रुप के मेटल फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ाने की घोषणा ने भी गिरावट को तेज किया है। शनिवार को किए गए इस ऐलान के अनुसार, कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स का मार्जिन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत किया गया है, जबकि कॉमेक्स 5000 सिल्वर फ्यूचर्स का मार्जिन 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया जाएगा। ये बदलाव सोमवार को बाजार बंद होने के बाद लागू होंगे, जिससे ट्रेडर्स पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका है।
Gold-Silver ETFs: निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बोनांजा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी के अनुसार, सोना और चांदी में आई हालिया “फ्लैश क्रैश” जैसी गिरावट को ट्रेंड रिवर्सल की बजाय ओवरबॉट बाजारों के ठंडा होने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि इन धातुओं का लॉन्ग-टर्म आउटलुक अब भी स्ट्रक्चरल रूप से मजबूत है। केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीद, चांदी में लगातार सप्लाई डेफिसिट और भू-राजनीतिक तनाव लॉन्ग-टर्म में इन धातुओं को सपोर्ट प्रदान करते हैं।
वहीं मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स इंडिया में ETF प्रोडक्ट हेड और फंड मैनेजर सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि चांदी में आई बहुत तेज उछाल के बाद सतर्क रुख जरूरी था। उन्होंने निवेशकों को कीमती धातुओं में अधिक आवंटन को कम करने और पोर्टफोलियो को लॉन्ग-टर्म रणनीति के मुताबिक संतुलित करने की सलाह दी है। उनका मानना है कि फिलहाल ट्रेंड की और पुष्टि का इंतजार करना समझदारी होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस समय रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो के लिहाज से चांदी की तुलना में सोना बेहतर विकल्प नजर आता है।
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