Gold-Silver ETFs: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ETFs) में बुधवार 8 अप्रैल को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कई ETF के भाव कारोबार के दौरान 4 प्रतिशत तक उछल गए। यह उछाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी के बीच आया है। अमेरिका-ईरान के बीच हुए युद्धविराम और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के चलते बुधवार को कीमती धातुओं की मांग में तेजी देखने को मिली।
सिल्वर ETF में सबसे ज्यादा तेजी
सबसे अधिक तेजी सिल्वर ETFs में देखने को मिली। SBI सिल्वर ETF और निपॉन इंडिया सिल्वर ETF में 4.3% से ज्यादा की तेजी देखी गई। वहीं ICICI प्रूडेंशियल सिल्वर ETF करीब 4.1% तक उछल गया। टाटा सिल्वर ETF में भी 4% से अधिक की मजबूती देखने को मिली।
सोने से जुड़े ETFs में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। ICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF और SBI गोल्ड ETF में 2.3% से ज्यादा की तेजी आई। वहीं निपॉन इंडिया ETF गोल्ड BeES करीब 2.4% तक चढ़ गया। टाटा गोल्ड ETF भी बढ़त के साथ ट्रेड करता दिखा।
तीन हफ्ते के हाई पर सोने-चांदी का भाव
अंतरराषट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें बुधवार को तीन हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। स्पॉट गोल्ड का भाव 2.3% बढ़कर लगभग 4,812.49 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसमें 3% से ज्यादा की तेजी भी देखी गई और ये 19 मार्च के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए।
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। इससे महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं। इसी के साथ अमेरिकी डॉलर में कमजोरी आई, जिसने सोना और चांदी को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया।
हालांकि युद्ध विराम के ऐलान के बाद ग्लोबल शेयर बाजारों में भी भारी तेजी दिखी। इसके बावजूद निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना और चांदी में दिलचस्पी बनाए रखी।
निवेशकों की रणनीति क्या संकेत देती है
मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि, मौजूदा तेजी निवेशकों के बीच “मिक्स्ड सेंटिमेंट” को दिखाता है। एक तरफ निवेशक इक्विटी मार्केट में जोखिम ले रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अनिश्चितता को देखते हुए गोल्ड और सिल्वर जैसे सुरक्षित विकल्पों में भी निवेश बनाए रख रहे हैं। निवेशक यह देख रहे हैं कि युद्धविराम का ऐलान अस्थायी है और आगे की बातचीत पर काफी कुछ निर्भर करता है।
खासतौर पर, चांदी ने सोने के मुकाबले बेहतर परफॉर्म किया है। चांदी को सुरक्षित निवेश के साथ-साथ इंडस्ट्रियल डिमांड का भी सपोर्ट मिलता है। एनालिस्ट्स का कहना है कि कीमती धातुओं को शॉर्ट टर्म में सपोर्ट मिल सकता है। बाजार की दिशा अब मुख्य रूप से भू-राजनीतिक घटनाक्रम, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगी।
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