'रिस्क नहीं लेना सबसे बड़ा रिस्क है', जानिए वॉरेन बफे ऐसा क्यों कहते हैं

वॉरेन बफे का मानना है कि रिस्क नहीं लेना सबसे बड़ा रिस्क है। उन्होंने यह बात निवेश के मामले में कही है। उनकी यह बात आज के बाजार के मौहाल पर सटीक बैठती है। बाजार में गिरावट से कई इनवेस्टर्स डर गए हैं। कुछ अपने पैसे निकालने के बारे में सोच रहे हैं

अपडेटेड May 07, 2026 पर 8:02 AM
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पिछले कुछ महीनों में बाजार में आई गिरावट से निवेशक काफी मायूस हैं।

दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में से एक वॉरेन बफे का मानना है कि रिस्क नहीं लेना सबसे बड़ा रिस्क है। उन्होंने यह बात निवेश के मामले में कही है। उनकी यह बात आज के बाजार के माहौल में सटीक बैठती है। पिछले कुछ महीनों में बाजार में आई गिरावट से निवेशक काफी मायूस हैं। कई निवेशक तो शेयर बाजार से पैसे निकालने तक के बारे में सोच रहे हैं।

बाजार में गिरावट से कई इनवेस्टर्स डर जाते हैं

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आने पर कई इनवेस्टर्स डर जाते हैं। खासकर जिन इनवेस्टर्स ने तेजी के बाजार में निवेश किया होता है, उन्हें गिरावट से बड़ा डर लगता है। उन्हें बाजार में निवेश करना जोखिमभरा लगने लगता है। बफे का कहना है कि रिस्क से बचने की कोशिश सबसे बड़ी गलती है। उन्होंने कहा है, "आपको बाजार के उतार-चढ़ाव को अपना दोस्त मानना चाहिए न कि दुश्मन।" उन्होंने निवेश में खुद कई बड़े रिस्क लिए थे।


निवेशक डर की वजह से कमाई का मौका चूक जाते हैं

बफे का निवेश का सिद्धांत बहुत आसान है। उनका कहना है कि जब लोग बाजार में गिरावट आने पर शेयर बेच रहे हों तो आपको खरीदना चाहिए। साथ ही जब बाजार चढ़ने पर लोग शेयर खरीद रहे हैं तो आपको बेचना चाहिए। उनका मानना है कि ज्यादातर निवशकों के व्यवहार में समानता दिखती है। जब बाजार गिरता है तो वे डर कर शेयर बेच देते हैं। जब बाजार चढ़ता है तो वे लालच में शेयर खरीदने लगते हैं। समझदार निवेशक ठीक इसके उलट करते हैं।

बगैर बिजनेस को समझे निवेश करना सबसे बड़ा रिस्क

उन्होंने कहा था कि निवेश में रिस्क तब होता है, जब आपको पता नहीं होता कि आप क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। उनका मतलब ऐसे बिजनेस में निवेश से है, जिसे समझे बगैर निवेशक इनवेस्ट करते हैं। उनका कहना है कि आपको निवेश करने से पहले जरूरी रिसर्च करना चाहिए। दूसरों को देखकर अगर आप निवेश करते हैं तो आपको बड़ा लॉस हो सकता है। निवेश के मामले में अपनी समझ का इस्तेमाल करना जरूरी है।

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बाजार में बड़ी गिरावट में टिके रहने पर बनता है पैसा 

साल 2007-08 के फाइनेंशियल क्राइसिस में जिन निवेशकों ने अपना निवेश बनाए रखा, उन्होंने मोटा मुनाफा कमाया। इसी तरह 2020 में कोविड शुरू होने पर मार्च में शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। जिन लोगों ने बाजार में गिरावट के डर से अपने पैसे निकाल लिए, वे बाद में बाजार में आई तेजी का फायदा उठाने का मौका चूक गए। हर 8-10 साल बाद बाजार में बड़ी गिरावट आती है। जो निवेशक इस गिरावट में डरकर अपने शेयर बेच देते हैं तो वे बाद में आने वाली तेजी का फायदा उठाने का मौका चूक जाते हैं।

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