Gold-Silver Prices: साल 2026 की शुरुआत से ही कीमती धातुओं में मजबूती देखने को मिली है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब 10% और चांदी में लगभग 5% की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि इस दौरान शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव बना रहा।
क्यों बढ़ रही हैं सोने-चांदी की कीमतें?
रिपोर्ट के अनुसार, सोना-चांदी की यह तेजी सीधी रेखा में नहीं बल्कि उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ी है। इस बढ़त के पीछे कई ग्लोबल कारण हैं। इनमें भू-राजनीतिक तनाव, ग्लोबल आर्थिक सुस्ती की आशंका और अमेरिकी मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदें शामिल हैं।
भारत में फिजिकल डिमांड कमजोर, निवेश मांग मजबूत
हालांकि कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में सोने-चांदी की फिजिकल डिमांड कमजोर बनी हुई है, क्योंकि ऊंचे दाम पर खरीदारी कम हो रही है। इसके विपरीत, निवेश के तौर पर मांग मजबूत बनी हुई है। खासतौर पर ETF के जरिए। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अब पारंपरिक खरीदारी से हटकर वित्तीय साधनों की ओर बढ़ रहे हैं।
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर ऊंचे दाम पर खरीदारी करने के बजाय “buy on dips” यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।
ब्रोकरेज के मुताबिक, हालिया तेजी के बाद निकट अवधि में कीमतों में ठहराव या हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है, जो निवेश के लिए बेहतर मौका दे सकती है।
निवेश के विकल्पों की बात करें तो निवेशक गोल्ड और सिल्वर ETF, एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स और फिजिकल गोल्ड-चांदी, सभी विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। हालांकि धीरे-धीरे निवेशकों का झुकाव फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की ओर बढ़ता दिख रहा है।
आगे का आउटलुक क्या कहता है
ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि निकट अवधि में मजबूत डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड और लगातार महंगाई जैसे फैक्टर्स कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं। लेकिन लंबी अवधि का नजरिया अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। भू-राजनीतिक जोखिम, ग्लोबल कर्ज का बढ़ता स्तर और साल के आगे चलकर मॉनिटरी पॉलिसी में ढील की उम्मीद जैसे कारण सोने-चांदी को सपोर्ट दे सकते हैं।
ब्रोकरेज का कहना है कि ऐतिहासिक रूप से सोना निवेशकों को स्थिर और लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देता रहा है। ऐसे में कीमतों में आने वाली गिरावट को बाहर निकलने का संकेत नहीं, बल्कि निवेश बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
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