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LIC समेत सरकारी वित्तीय संस्थानों में हिस्सा बेचने के लिए कितना आगे बढ़ी सरकार, DIPAM सेक्रेटरी ने दिया अपडेट

LIC Stake Sale: सरकार के पास वर्तमान में LIC में 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वर्तमान में पब्लिक सेक्टर के कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने अभी तक SEBI की ओर से तय मिनिमम 25 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम को पूरा नहीं किया है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Aug 02, 2025 पर 7:57 PM
LIC समेत सरकारी वित्तीय संस्थानों में हिस्सा बेचने के लिए कितना आगे बढ़ी सरकार, DIPAM सेक्रेटरी ने दिया अपडेट
दीपम, वित्त मंत्रालय के तहत आता है और पब्लिक सेक्टर की कंपनियां में सरकारी हिस्सेदारी को मैनेज करता है।

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और पब्लिक सेक्टर के अन्य वित्तीय संस्थानों में सरकार की ओर से माइनॉरिटी स्टेक बेचने के लिए कवायद आगे बढ़ गई है। सरकार ने इस बिक्री के लिए मर्चेंट बैंकरों और कानूनी सलाहकारों को अपॉइंट किया है। है। यह बात डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के सेक्रेटरी अरुणीश चावला ने कही है। उनका कहना है कि LIC के मामले में सरकार ने RFP (Request for Proposal) की प्रक्रिया पूरी कर ली है। मर्चेंट बैंकरों और कानूनी सलाहकारों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

आगे कहा कि मर्चेंट बैंकर सभी वित्तीय संस्थानों के लिए काम करेंगे। दीपम ने फरवरी में पब्लिक सेक्टर के बैंकों और लिस्टेड वित्तीय संस्थानों में हिस्सेदारी बेचने में सरकार की मदद के लिए मर्चेंट बैंकरों और कानूनी फर्म्स से बोलियां मंगाई थीं। दीपम ने 2 RFP जारी किए हैं। इनके मुताबिक, मर्चेंट बैंकरों और कानूनी सलाहकारों को 3 साल के लिए पैनल में शामिल किया जाएगा। इस अवधि को एक और साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

सरकार क्यों बेच रही है हिस्सेदारी

वर्तमान में पब्लिक सेक्टर के कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने अभी तक कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से तय मिनिमम 25 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम को पूरा नहीं किया है। सरकार ने एंटिटीज के लिए सरकारी हिस्सेदारी कम करने और पब्लिक फ्लोट मानदंडों को पूरा करने की डेडलाइन 1 अगस्त, 2026 तय की है। चावला ने कहा, “अगले 3 वर्षों में इंडीविजुअल ट्रांजेक्शन कभी भी हो सकते हैं। मर्चेंट बैंकर वित्तीय संस्थानों और पब्लिक सेक्टर के बैंकों (पीएसबी) से जुड़े सभी लेनदेन की देखरेख करेंगे।” दीपम, वित्त मंत्रालय के तहत आता है और पब्लिक सेक्टर की कंपनियां में सरकारी हिस्सेदारी को मैनेज करता है।

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