सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान दो हफ्ते के अंदर हो सकता है। देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर 'कलेक्शन पार्टनर्स' शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी

अपडेटेड Jul 03, 2026 पर 5:01 PM
इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है।

सरकार नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह बताया। इस बारे में आधिकारिक घोषणा दो हफ्ते के अंदर हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस स्कीम के तहत 1,000 टन से ज्यादा सोना आने की उम्मीद है।

नई स्कीम में ज्वेलर्स होंगे कलेक्शन पार्टनर्स

देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर 'कलेक्शन पार्टनर्स' शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी। पहले सिर्फ बैंकों को इसकी इजाजत थी। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा, "प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बतौर कलेक्शन पार्टनर्स शामिल किया जा सकता है।"


गोल्ड के इंपोर्ट में कमी लाने में मिल सकती है मदद

देश में ज्वेलर्स से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बदलाव करने की गुजारिश की है। गोल्ड का इंपोर्ट घटाने के लिए उनका जोर ऐसे सॉल्यूशंस पर है, जिसका खराब असर इस सेक्टर से जुड़े लोगों की रोजीरोटी पर नहीं पड़े। अगर देश में परिवारों में रखा 5 फीसदी सोना भी मॉनेटाइज होता है तो इससे 90 अरब डॉलर की लिक्विडिटी मुमकिन हो सकती है।

पीएम मोदी ने की थी सोना नहीं खरीदने की अपील

हाल में प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इंडिया दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में शामिल है। भारत में ज्वेलरी के साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं। ज्वेलरी के खरीदने से सोने का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसलिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के जरिए काफी सोना आ सकता है।

2015 में हुई थी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत

सरकार ने 2015 में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सोने के इंपोर्ट में कमी लाकर करेंट अकाउंट डेफिसिट को घटाना था। इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड खरीदने की जगह गोल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इनवेस्टर्स अपना सोना बैंक लॉकर्स में डिपॉजिट कर 2.25 से 2.5 फीसदी इंटरेस्ट कमा सकते हैं। विड्रॉल के समय इनवेस्टर्स के पास फिजिकल गोल्ड या उसके बराबर पैसा वापस लेने की इजाजत थी।

पुरानी स्कीम में 10 सालों में सिर्फ 38 टन सोना आया

स्कीम की शुरुआत के 10 साल बाद तक सिर्फ 38 टन सोना ही आ सका। यह इंडिया में परिवारों के पास रखे कुल सोना का बहुत कम हिस्सा है। इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है। सरकार ने स्कीम में मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रोक दी थी। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को इंटरेस्ट का पेमेंट सरकार करती है। इस वजह से यह स्कीम सरकार के लिए नुकसानदेह रही।

पुरानी स्कीम में सरकार को उठाना पड़ा लॉस

ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा, "आखिर में सरकार को इस स्कीम में लॉस उठाना पड़ा। सरकार को सोने की कीमतों में आए तेजी का बोझ उठाना पड़ता था। साथ ही उसे इनवेस्टर्स को सालाना 2 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता था।" यह स्कीम हेज्ड (Hedged) नहीं थी, जिससे विड्रॉल के समय सरकार को सोने की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उठाना पड़ता था।

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इन वजहों से असफल रही पुरानी स्कीम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि स्ट्रक्चरल वजहों से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम विफल रही। AIJGF ने कहा कि इस स्कीम में दिलचस्पी दिखाने के लिए बैंकों को किसी तरह के इनसेंटिव की व्यवस्था नहीं थी। नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से गोल्ड के इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी आ सकीत है। साथ ही घरों में बेकार पड़े सोने का इस्तेमाल इकोनॉमी के हित में हो सकेगा।

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