सरकार IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से शेयर बेचने पर विचार कर सकती है। सरकार का इस बैंक में हिस्सेदारी बेचने का प्रयास असफल होने के बाद यह कदम उठाया जा सकता है। वर्तमान में IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग केवल 5.29 प्रतिशत है, जिससे बैंक का सही मूल्यांकन करना मुश्किल हो जाता है। सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका बैंक पर नियंत्रण है। वहीं, भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48 प्रतिशत है।
विनिवेश के तहत सरकार IDBI Bank में अपनी और LIC की हिस्सेदारी में से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रही थी। लेकिन इस महीने की शुरुआत में इस प्रस्तावित बिक्री को रद्द कर दिया गया। इसकी वजह यह रही कि कथित तौर पर दो संभावित खरीदारों की वित्तीय बोलियां, रिजर्व प्राइस से कम थीं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि IDBI Bank में पब्लिक शेयरहोल्डिंग कम होने के कारण सही मार्केट वैल्यूएशन तय करना मुश्किल है। अगर पब्लिक शेयरहोल्डिंग को 10–15 प्रतिशत बढ़ाया जाए तो शेयर की कीमत ज्यादा भरोसेमंद और पारदर्शी तरीके से तय हो सकेगी। यह भी कहा जा रहा है कि रणनीतिक बिक्री, OFS के एक या दो चरणों के बाद भी की जा सकती है।
लंबे वक्त से अटका है प्राइवेटेाइजेशन
IDBI Bank के निजीकरण यानि कि सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री की प्रक्रिया लंबे वक्त से अटकी हुई है। सरकार का प्लान IDBI Bank में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का था। वहीं LIC, बैंक में 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही थी। सरकार ने सबसे पहले साल 2016 में घोषणा की थी कि वह IDBI Bank का प्राइवेटाइजेशन करना चाहती है। यह विचार सबसे पहले फरवरी 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय बजट भाषण में आधिकारिक तौर पर दिया था। बैंक में सरकारी हिस्सेदारी कम करने की पहली कोशिश मूल्यांकन संबंधी चिंताओं के कारण नाकाम हो गई थी।
हालांकि, सरकार ने बाद में कंट्रोलिंग स्टेक LIC को बेच दिया। जनवरी 2019 में LIC ने IDBI Bank को भारी खराब ऋणों (bad loans) से बचाने के लिए लगभग 21,624 करोड़ रुपये में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली। इसके बाद बैंक प्राइवेट सेक्टर का बैंक बन गया। दिसंबर 2020 में बैंक में LIC की हिस्सेदारी घटकर 49.24 प्रतिशत हो गई।
इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2020 में वित्त वर्ष 2021 का बजट पेश करते हुए बैंक में सरकारी हिस्सेदारी और कम करने का प्रपोजल रखा। IDBI Bank के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया को औपचारिक गति तब मिली, जब आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मई 2021 में बैंक में मैनेजमेंट कंट्रोल के ट्रांसफर के साथ-साथ रणनीतिक विनिवेश के लिए अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दी। सरकार ने अक्टूबर, 2022 में LIC के साथ मिलकर इस बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EoI) आमंत्रित किए। अक्टूबर 2022 में ही KPMG India को लेनदेन सलाहकार (Transaction Advisor) नियुक्त किया गया। फरवरी 2026 में एमिरेट्स NBD और फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स से वित्तीय बोलियां मिलीं।