विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार FDI नियमों में जल्द दे सकती है ढील-सूत्र

सरकार सीधे विदेश निवेश के नियमों में दो बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है। पहला बदलाव ये है कि अगर कोई पैरेंट कंपनी सीधे विदेशी निवेश के लिए एक बार मंजूरी ले लेती है और इस पैसे को अपनी किसी डाउन स्ट्रीम कंपनी में लगाना चाहती है तो इसके लिए उसे सरकार से फिर से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी

अपडेटेड Aug 18, 2026 पर 3:30 PM
Foreign Direct Investment : सरकार अब 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा के एफडीए प्रस्ताव की सीमा को बढ़ा कर 15000 करोड़ रुपए करने जा रही है

देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार FDI नियमों में ढील दे सकती है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक इसके लिए सब्सिडियरी के लिए फिर मंजूरी की जरूरत खत्म हो सकती है। नियम बदलने के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट मंजूरी मिल सकती है। सीएनबीसी-आवाज़ के इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर लक्ष्मण राय ने सूत्रों के हवाले से बताया कि देश में FDI नियम आसान होंगे सरकार की देश में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए FDI की शर्तों में बड़ी ढील देने की तैयारी है। अब सब्सिडियरी के लिए फिर से मंजूरी लेने की जरूरत खत्म हो सकती है। 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के FDI प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी की जरूरत भी खत्म की जा सकती है।

सब्सिडियरी के लिए फिर से मंजूरी लेने की जरूरत हो सकती है खत्म

आसान शब्दों में समझें तो सरकार सीधे विदेश निवेश के नियमों में दो बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है। पहला बदलाव ये है कि अगर कोई पैरेंट कंपनी सीधे विदेशी निवेश के लिए एक बार मंजूरी ले लेती है और इस पैसे को अपनी किसी डाउन स्ट्रीम कंपनी में लगाना चाहती है तो इसके लिए उसे सरकार से फिर से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। अभी ऐसा होता है कि अगर कोई पैरेंट कंपनी किसी राशि के सीधे विदेशी निवेश की मंजूरी लेती है तो उसे सब्सिडरी कंपनी में इसके निवेश के लिए सरकार से दोबारा मंजूरी लेनी होती है। जबकि, इसकी मंजूरा पहले ही पैरेंट कंपनी ले चुकी होती है।


सूत्रों के मुताबिक सरकार अब इस नियम में ढ़ील देते हुए यह प्रावधान करने जा रही है कि अगर पैरेंट कंपनी ने एक बार सीधे विदेश निवेश की मंजूरी ले ली है तो जिस सेक्टर के लिए और जिस एमाउंट के लिए मंजूरी ली है उसी सेक्टर और मात्रा में डाउन स्ट्रीम कंपनी में निवेश के लिए अलग से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इसे बड़े-बड़े एफडीआई के प्रस्ताव आसान हो जाएंगे और जल्द से जल्द भारत में आ सकेंगे। इसके जरिए सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा विदेशी पूंजी भारत में लाई जाए।

15000 करोड़ रुपए तक के एफडीए प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी की जरूरत नहीं

अभी 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा के एफडीआई प्रस्ताव के लिए संबंधित मंत्रालय, इंटरमिनिस्ट्रियल ग्रुप और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स से मंजूरी लेनी होती है। ऐसे में इस तरह से मंजूरी की प्रक्रिया काफी लंबी हो जाती है। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार अब 5000 करोड़ रुपए से ज्यादा के एफडीए प्रस्ताव की सीमा को बढ़ा कर 15000 करोड़ रुपए करने जा रही है। यानी अब अगर 15000 करोड़ रुपए का एफडीए प्रस्ताव है तो कंपनी को सिर्फ संबंधित मंत्रालय से ही मंजूरी लेनी होगी। अगर मामला बहुत ज्यादा पेचीदा तो ही यह प्रस्ताव आईएमजी यानी इंटरमिनिस्ट्रियल ग्रुप के पास जा सकता है। लेकिन 15000 करोड़ रुपए तक के एफडीआई प्रस्ताव को सीसीए की मंजूरी बिल्कुल भी जरूरी नहीं होगी। इस फायदा यह होगा कि एफडीआई ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तेजी से भारत आ सकेगा।

 

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