केंद्र सरकार इस महीने के अंत तक बैंक डिपॉजिट के लिए इंश्योरेंस कवर 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 8-12 लाख रुपये कर सकती है। मामले से वाकिफ सूत्रों ने यह जानकारी दी है। फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्रेटरी एम नागराजू ने बजट के बाद पत्रकारों से हुई बातचीत में कहा था कि सरकार डिपॉजिट इंश्योरेंस पर लिमिट बढ़ाने पर विचार कर रही है।
बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर में बढ़ोतरी ऐसे वक्त पर हुई है, जब एक कोऑपरेटिव बैंक (न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक) पर रिजर्व बैंक को रेगुलेटरी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। इस बैंक में 122 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है और इस वजह से उसके जनरल मैनेजर और एक अन्य अभियुक्त के खिलाफ कार्रवाई हुई है। दोनों अभियुक्त फिलहाल 21 फरवरी तक हिरासत में हैं।
कोऑपरेटिव बैंक पर नए लोन देने से रोक लगाई गई है और निकासी पर भी रोक लगाई गई है। बैंक डिपॉजिट पर इंश्योरेंस की सुविधा डिपॉजिट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) द्वारा मुहैया कराई जाती है। डिपॉजिट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन, रिजर्व बैंक की पूर्णस्वामित्व वाली सब्सिडियरी है, जो कमर्शियल बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, स्थानीय इलाके के बैंकों और कोऑपरेटिव बैंकों के डिपॉजिट इंश्योरेंस का कामकाज देखती है।
डिपॉजिट इंश्योरेंस क्या है?
डिपॉजिट इंश्योरेंस एक तरह का कवर होता है, जो ऐसी स्थिति में बैंक डिपॉजिटर्स का बचाव करता है, जब बैंक इस कर्ज का भुगतान करने में सक्षम नहीं होते। इस इंश्योरेंस कवर में सभी तरह के डिपॉजिट शामिल होते हैं, सेविंग्स, फिक्स्ड, करेंट, रेकरिंग आदि। हालांकि, इसमें फॉरेन, केंद्र या राज्य सरकारों के डिपॉजिट का कवर शामिल नहीं होता। फिलहाल, डिपॉजिटर को 5 लाख तक के जमा पर इंश्योरेंस कवर मिलता है।