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Groww Shares: 9% उछलकर शेयर पहुंचे रिकॉर्ड हाई पर, इस भाव तक जाएगा ऊपर!

Groww Shares: अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की उम्मीदों ने दुनिया भर के बाजारों में जोश भर दिया। मार्केट की शानदार रौनक के बीच ग्रो के शेयरों को BoFA (बैंक ऑफ अमेरिका) के रुझान से ऐसा सपोर्ट मिला कि यह उछलकर रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। जानिए बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज इस पर बुलिश क्यों है और बाकी ब्रोकरेजेज का रुझान क्या है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Apr 15, 2026 पर 4:01 PM
Groww Shares: 9% उछलकर शेयर पहुंचे रिकॉर्ड हाई पर, इस भाव तक जाएगा ऊपर!
Groww के शेयरों की घरेलू स्टॉक मार्केट में पिछले साल 12 नवंबर 2025 को एंट्री हुई थी।

Groww Shares: ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स के शेयरों ने तो आज धमाल मचा दिया। बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने इसकी खरीदारी की रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की तो निवेशक चहक उठे और 9% से अधिक उछलकर यह रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन अब भी यह भी काफी मजबूत स्थिति में है। आज बीएसई पर यह 7.09% की बढ़ोतरी के साथ ₹208.50 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में यह 9.37% उछलकर ₹212.95 तक पहुंच गया था जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड हाई है।

आगे ती बात करें तो बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज ने खरीदारी की रेटिंग के साथ इसकी कवरेज शुरू की है और टारगेट प्राइस प्रति शेयर ₹235 पर फिक्स किया है। इससे पहले यूबीएस ने ग्रो को 'न्यूट्रल' रेटिंग और ₹185 के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू किया था। पिछले महीने जेपीमॉर्गन ने ₹210 के टारगेट प्राइस और ओवरवेट रेटिंग के साथ ग्रो की कवरेज शुरू की थी।

Groww के शेयरों पर क्यों है ब्रोकरेज बुलिश?

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज का कहना है कि भारत में खुदरा निवेश के मजबूत रुझान का फायदा उठाने के लिए ग्रो अच्छी स्थिति में है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2028 के बीच कंपनी की रेवेन्यू सालाना 30% की रफ्तार से बढ़ेगा। ब्रोकरेज फर्म का यह भी कहना है कि ग्रो की प्रॉफिटेबिलिटी दमदार है और इसमें अभी और तेजी की गुंजाइश है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2028 तक ग्रो का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन बढ़कर 67% और नेट प्रॉफिट मार्जिन 52% तक पहुंच सकता है। रिस्क की बात करें तो कैपिटल मार्केट के कमजोर परफॉरमेंस और छह महीने के लॉक-इन पीरियड की समाप्ति जैसे नियर टर्म रिस्क हैं।

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